पंजाब शिक्षा विभाग में किताब खरीद घोटाले की जांच के लिए गठित जस्टिस एएन जिंदल कमीशन के कार्यकाल को एक माह के लिए बढ़ा दिया।
राज्य सरकार ने जिंदल कमीशन का गठन जून में किया था और तीन माह में रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा निर्धारित की थी लेकिन कमीशन अभी तक अपनी रिपोर्ट को अंतिम रुप नहीं दे सका है।
पंजाब के स्कूलों में विवादित किताबों की आमद और खरीद में बडे़ पैमाने पर हुई धांधली को लेकर शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका पर उंगली उठी थी और सरकार की छवि खराब होते देख मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने स्वतंत्र जांच के आदेश दिए थे।
जस्टिस जिंदल की नियुक्ति को लेकर भी प्रमुख विपक्षी कांग्रेस ने कई सवाल उठाए थे आरोप लगाया कि जिंदल शिक्षा मंत्री मलूका के नजदीकी हैं लिहाजा न्याय नहीं मिलेगा।
सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए किताब खरीद के लिए तत्कालीन डीजीएसई काहन सिंह पन्नू ने एक कमेटी का गठन कर नियमानुसार किताब खरीदने की हिदायत दी थी।
इस मुद्दे पर मलूका और पन्नू में विवाद छिड़ गया और इसके बाद मलूका ने अलग से एक कमेटी का गठन कर किताबों की खरीद को विश्वसनीय बनाने को कहा। कमेटी ने किताबें देखी तक नहीं और उनको लाइब्रेरी भेजने के आदेश दे दिए।
यह किताबें सरदूलगढ़ के एक फर्जी पब्लिशर फ्रेंड्स इंटरप्राइजेज से खरीदी गईं जबकि यह कंपनी पहले पाइप बनाने का काम करती थी। उस समय यह भी चर्चा हुई थी कि मलूका की बहू व डिप्टी डीजीएसई परमपाल कौर की फ्रेंड्स इंटरप्राइजेज से नजदीकियां हैं।