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बम ब्लास्ट मामले का आरोपी बरी, सबूत पेश नहीं कर पाई पुलिस

Fri, 23 Dec 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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30 जून 1999 को सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट आफिस की पार्किंग में हुए बम ब्लास्ट के आरोपी और बबर खालसा इंटरनेशनल के आतंकी रतनदीप सिंह को जिला अदालत ने बरी कर दिया। 
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इसी साल 8 जनवरी को रतनदीप सिंह के खिलाफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने विस्फोटक एक्ट 3, 4 व 5 और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। उसके खिलाफ पंजाब में 12 और चंडीगढ़ में एक केस दर्ज था। फिलहाल नाभा जेल में बंद रतनदीप इससे पहले 10 केसों में बरी हो चुका है।

बचाव पक्ष के वकील बलबीर सिंह सेवक ने बताया कि रतनदीप के खिलाफ पुलिस के पास सपोर्टिंग एविडेंस (अनुपूरक प्रमाण) नहीं थे। मामले में सजा पा चुके गुरबख्श सिंह और शेर सिंह की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर रतनदीप के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
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पुलिस अदालत में कोई भी सबूत पेश नहीं कर सकी, जिस आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। नेपाल बार्डर से पकड़ा था।

इससे पहले कई आपराधिक मामलों में वांछित रतनदीप बम ब्लास्ट केस में 10 वर्ष से भगोड़ा था। दो साल पहले 18 सितंबर 2014 को पंजाब पुलिस ने उसे नेपाल बार्डर से गिरफ्तार किया था।
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सेक्टर-34 में हुआ था ब्लास्ट

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जींद के समीप गांव रोहड़ निवासी रतनदीप पर 1999 में शहर में हुए बम ब्लास्ट में आरडीएक्स मुहैया कराने का आरोप था। इस मामले में अदालत अन्य दो दोषियों को पहले ही 10-10 साल कै द ही सजा सुना चुकी है।

इसके अलावा मामले में ही सह आरोपी और ब्लास्ट में रतनदीप की आर्थिक मदद करने वाले जसबीर की लंबी बीमारी के बाद पिछले साल अगस्त में मौत हो गई थी। उसे पुलिस ने करीब तीन साल पहले ही नवंबर में तरनतारन के एक गांव से गिरफ्तार किया था। 

सेक्टर-34 में हुआ था ब्लास्ट
सेक्टर-34 स्थित पासपोर्ट आफिस की पार्किंग में हुए बम ब्लास्ट का मास्टरमाइंड खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का चीफ परमजीत पंजवड़ था। 30 जून 1999 को हुए ब्लास्ट में चार लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। 

इसके अलावा कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। दोपहर करीब 12:30 बजे हुए ब्लास्ट के लिए स्कूटर का इस्तेमाल किया गया था। बम स्कूटर की डिग्गी में रखा गया था। 

हरियाणा नंबर का स्कूटर पानीपत से पंजीकृत हुआ था। इसके बाद इसे सात बार बेचा जा चुका था। जांच में पता चला था कि स्कूटर को शेर सिंह 25 जून को शहर लेकर आ गया था। यहां उससे रतनदीप ने स्कूटर खरीदा था। पुलिस के अनुसार रतनदीप घटना के एक दिन पहले ही चंडीगढ़ पहुंचा था। 
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