चार वार्डों में से एक पर ही अकाली की जीत
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नगर निगम चुनाव में भाजपा और अकाली दल मिलकर चुनाव लड़े। भाजपा की बड़ी जीत हुई, लेकिन शिअद चुनावी मैदान में चित हो गई। कुल 26 में से 22 वार्डों से भाजपा और चार से अकाली दल ने चुनाव लड़ा था। भाजपा ने 20 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि शिअद चार में से एक ही सीट पर जीत सकी। यहां तक कि चंडीगढ़ शिअद के प्रधान जगजीत सिंह कंग भी पत्नी इंद्रजीत कौर को जीत नहीं दिलवा सके।
ऐसे समय में जबकि पंजाब में विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा होनेवाली है। वहां पर अकाली दल-भाजपा गठबंधन की दो टर्म से सरकार है। चंडीगढ़ में लोगों ने भाजपा के पक्ष में तो भारी मतदान कर बड़ी जीत दिला दी, लेकिन अकालियों को चारों खाने चित कर दिया।
टिकट बंटवारे के दौरान अकाली दल 10 सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन उन्हें चार वार्ड ही पिछले चुनावों की तरह हिस्से में आई। पिछले आम चुनाव में शिअद ने चार वार्डों में से दो में जीत हासिल की थी। वार्ड नंबर-10 और 15 से शिअद के प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। शिअद चंडीगढ़ के अध्यक्ष का कहना है कि भाजपा के बड़े नेता वार्डों में आए, लेकिन मंडल स्तर के भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने साथ नहीं दिया।
उधर, भाजपा मंडल नंबर पांच के प्रधान संजीव वर्मा का कहना है कि शिअद ने कमजोर उम्मीदवारों को उतारा था। लोग भाजपा को पसंद कर रहे हैं, अकाली दल को नहीं। इसका ताजा उदाहरण नगर निगम का चुनाव परिणाम है। उन्होंने बताया कि इसी वार्ड में नोटा का बटन सबसे अधिक लोगों ने दबाया।