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चंडीगढ़ में अवैध निर्माण पर कार्रवाई से भड़के भाजपाई, जमीन पर लेटे, पुलिस ले गई थाने 

Thu, 07 Jan 2021 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ में हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठे भाजपा नेता। - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की इंदिरा कालोनी में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की तरफ से गुरुवार को अवैध निर्माण के लिए कार्रवाई की गई। इसके खिलाफ भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन किया। पहले भाजपा के नेता आईटी पार्क थाने में धरने पर बैठ गए। इसके बाद सभी नेताओं ने सेक्टर-9 स्थित हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर के सामने नारेबाजी की। भाजपा नेताओं ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) बेवजह लोगों को परेशान कर रहा है। 

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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा रोजाना अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसी कड़ी में गुरुवार को इंदिरा कालोनी में सीएचबी के कर्मचारी पहुंचे और चार मकानों में किए गए अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू कर दी। जैसे ही उन्होंने मकान तोड़ना शुरू किया तो एरिया के पार्षद विनोद अग्रवाल के साथ भाजपा नेता शशांक भट्ट, श्रीनिवास काला और अन्य नेताओं ने इसका विरोध किया और मकान के सामने ही जमीन पर लेट गए। 
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मामला बढ़ता देख कर भाजपा प्रदेश के महामंत्री रामवीर भट्टी, जिला नंबर-4 के प्रधान मनु भसीन, पार्षद शक्ति देवशाली और अन्य नेता भी मौके पर पहुंच गए। भाजपा नेताओं ने मौके पर ही नारेबाजी शुरू कर दी। तनाव बढ़ता देख पुलिस पहुंची और भाजपा नेताओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह सीएचबी की कार्रवाई का विरोध करते रहे। 
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भाजपा नेताओं को गिरफ्तार कर थाना ले गई पुलिस 
विवाद बढ़ता देख पुलिस ने भाजपा नेताओं को हिरासत में ले लिया और आईटी पार्क थाना ले गए। यहां पहुंचने के बाद भी भाजपा के नेता रुके नहीं और वहीं बैठ कर अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने करीब दो घंटे तक भाजपा नेताओं को थाने में रखा इसके बाद इन्हें छोड़ दिया गया। थाने से निकलते ही भाजपा के सभी नेता सेक्टर-9 स्थित चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर पहुंचे और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। 



भाजपा नेताओं ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की तरफ से बेवजह नोटिस भेजकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। लोगों ने खून-पसीने से मकान बनाए हैं, जिन्हें तोड़ा जा रहा है। यह सरासर गलत है। गौरतलब है कि इससे पहले भी बोर्ड की कार्रवाई का विरोध किया जाता रहा है। जबकि हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना होता है कि वह सिर्फ अवैध निर्माण के खिलाफ ही कार्रवाई करते हैं और उसे तोड़ते हैं। इसके लिए वह पहले नोटिस भेजते हैं।

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