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अरुण सूद बने मेयर, मोदगिल सी.डिप्टी, हरदीप डिप्टी मेयर

Fri, 08 Jan 2016 09:45 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आखिरकार 15 साल बाद चंडीगढ़ नगर निगम पर कब्जा करने में भाजपा कामयाब रही। शुक्रवार को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के तीनों पदों पर भाजपा -अकाली गठबंधन ने जीत दर्ज की। भाजपा मनोनीत पार्षदो और अपने पार्षदों की क्रास वोटिंग रोककर तीनों पद पर कब्जा करने में कामयाब रही है।
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अरुण सूद मेयर, देवेश मोदगिल सीनियर डिप्टी मेयर और अकाली पार्षद हरदीप सिंह डिप्टी मेयर बने है। भाजपा उम्मीदवार अरुण सूद ने कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश बस्सी को छह वोट से हराया। अरुण सूद को कुल 21 और बस्सी को 15 वोट मिले। जबकि सीनियर डिप्टी मेयर पद के प्रत्याशी देवेश मोदगिल ने कांग्रेस के दर्शन गर्ग को 10 वोट से हराया। मोदगिल ने कुल 36 वोट में से 23 वोट हासिल किए जबकि दर्शन गर्ग को 13 वोट मिले।

इसके साथ ही डिप्टी मेयर पद हरदीप सिंह ने मेयर के बराबर 21 वोट हासिल करके जीत दर्ज की। नगर निगम में 36 वोट में से कांग्रेस के कुल 8, भाजपा अकाली गठबंधन 13, बसपा दो, एक निर्दलीय, 9 मनोनीत पार्षदों के साथ  एक वोट सांसद का है।
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सांसद समेत भाजपा के सभी बड़े नेता रहे मौजूद
पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान सांसद किरण खेर भी मौजूद रहीं।  मतदान के दौरान दर्शक दीर्घा में पार्टी प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद प्रभात झा, भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन भी उपस्थित रहे। पिछले साल भी भाजपा अकाली के पास 15 वोट थे लेकिन वह सीनियर नेताओं की गुटबाजी के कारण मेयर की कुर्सी पर कब्जा नहीं कर पाई थी।।

मनोनीत के 5 भाजपा और 4 मनोनीत को
ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा मनोनीत के 5 पार्षदों का वोट लेने में कामयाब रही है जबकि कांग्रेस को 4 वोट मिले हैं। जबकि सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल ने मेयर और डिप्टी मेयर ने दो अतिरिक्त वोट लेकर अपनी मजबूती पेश की है इसके साथ ही उन्होंने पिछले साल हुए डिप्टी मेयर चुनाव में हारने का भी बदला ले लिया है। पिछले साल मोदगिल डिप्टी मेयर का चुनाव हार गए थे। ऐसा माना जा रहा है कि मोदगिल को बसपा या फिर दो मनोनीत के ज्यादा वोट लिए हैं।

खेर ने मतदान के बाद वोट दिखाई
मतदान से पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा और पूर्व मेयर सुभाष चावला ने वोट की गोपनीयता को लेकर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि पार्षद मतदान के समय मोबाइल फोन अपने पास रखते हैं। ऐसे में उन्होंने सदन में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी बंद करने के लिए कहा।

इसके बाद भाजपा पार्षद सौरभ जोशी और सतीश कैंथ ने कहा कि पंजाब के कई नगर निगमों में मतदान न करवाकर पार्षदों के हाथ खड़े करके ही चुनाव कर लिया जाता है। इसलिए यहां भी यही प्रक्रिया अपनाई जाए। लेकिन सदन में मौजूद चुनाव अधिकारी बाबूलाल और डीसी अजीत बाला जी जोशी इसके लिए तैयार नहीं हुए।

पार्षद बनने के कोर्ट जाना छोड़ा
नवनियुक्त मेयर अरुण सूद पेशे से वकील हैं लेकिन वह पार्षद बनने के बाद पिछले तीन साल से कोर्ट नहीं जा रहे हैं। अरुण सूद की पत्नी अंबिका सूद पंजाब सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद पर तैनात हैं। अरुण सूद के ससुराल हिमाचल के शिमला में है। मेयर चुनने के बाद पत्नी ने पति सूद को मिलने का प्रयास किया लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ और जोश को देखकर उन्हें भी पीछे हटना पड़ा। चुनाव जीतने के बाद अरुण सूद को उनके बेटे और बेटी ने फूलों का हार डालकर बधाई दी।
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