हरियाणा में भाजपा- हजकां गठबंधन की गांठ नई शर्तों पर ही टिकी रह सकती है। लोकसभा की सात सीटें जीतने के बाद भाजपा कुलदीप बिश्नोई को सीएम पद का प्रत्याशी बनाने को तैयार नहीं है। चार पर्यवेक्षकों ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें साफ है कि हरियाणा के भाजपा कार्यकर्ता यह नहीं चाहते कि बदली परिस्थितियों में सीएम किसी और पार्टी का नेता हो।
भाजपा अपने खाते में सात सीटें जोड़ने के अलावा, केंद्र में अपनी सरकार होना जोड़ रही है। इसके अलावा कुछ जाट नेताओं को भी हरियाणा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने समझौते के समय कुलदीप को सीएम पद का प्रत्याशी घोषित करने की बात कही थी, लेकिन मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सुषमा की बात थोड़ी कमजोर पड़ गई है।
गठबंधन के समय सुषमा ने कहा था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को अधिक सीटें मिलेंगी और हजकां को कम। लेकिन जब विधानसभा चुनाव होंगे तो सीएम पद के प्रत्याशी कुलदीप होंगे। अब परिस्थितियां इसके उलट हो गई हैं। प्रदेश में सात सीटें जीतने और केंद्र में मोदी के नाम पर सरकार बनाने के बाद हरियाणा में भी मोदी का नाम कैश करना चाहती है। उधर, कुलदीप बिश्नोई ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ कभी भी उनकी मुलाकात हो सकती है। हालांकि 27 या 28 जुलाई को कुलदीप की मुलाकात अमित शाह से होनी थी, लेकिन कुछ कारणों से विलंब हो गया।