हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक गठबंधन की नब्ज टटोलेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इशारे पर 25 जुलाई को पर्यवेक्षकों की यह टीम हरियाणा पहुंच जाएगी।
इसके बाद राज्य के सभी जिलों के कार्यकर्ताओं और आम लोगों से फीडबैक लिया जाएगा। इस कड़ी में पांच से छह जिलों के लोगों को एक ही स्थान पर इकट्ठा करके उनसे गठबंधन के संदर्भ में राय पूछी जाएगी। इसके बाद अंतिम निर्णय अमित शाह का होगा।
दरअसल भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस संदर्भ में कोई रिस्क नहीं लेना चाह रहा है। गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का भाजपा को क्या लाभ मिलेगा। इस बात पर पर्यवेक्षक चर्चा करेंगे। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि भाजपा को अकेले चलने में कितना लाभ मिल सकता है।
हरियाणा से रिपोर्ट हासिल करने के बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी। संभावना है कि इस माह के अंत तक पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा के संदर्भ में कोई बड़ा निर्णय ले सकता है। इसीलिए पर्यवेक्षकों को यह काम दो दिन के अंदर करने के लिए ताकीद किया गया है।
तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि भाजपा गठबंधन तोड़ने का फैसला सीधा अपने माथे पर नहीं मढ़ना चाहती है। नफा नुकसान के आंकलन के बाद इसे पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर भी तोड़ा जा सकता है।