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भाजपा का कार्यकारिणी समिति के सदस्य सत्यपाल जैन ने कहा कि दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की शक्ति वापस ली जाए

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चंडीगढ़। पूर्व सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य सत्यपाल जैन ने कहा कि एंटी डिफेक्शन लॉ के पिछले 35 वर्षों के अनुभव से पता चलता है कि विभिन्न राज्य विधानसभाओं के स्पीकर, कानून के अनुसार मामलों को तय करने की न्यायिक उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं, इसलिए अब समय आ गया है यह शक्तियां उनसे वापस ले ली जाएं।
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सत्यपाल जैन ने कहा कि विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की शक्तियों को विधानसभा के स्पीकरों से वापस लेकर भारत के निर्वाचन आयोग, न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय जैसे स्वतंत्र संस्थानों को दे दिया जाना चाहिए। जैन ‘भारत में संविधान-विरोधी दलबदल कानून’ विषय पर बियोंड लॉ एलसीएल द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बोल रहे थे।
इस वेबिनार पर 3000 से अधिक लोगों ने भाग लिया और जैन की बातें सुनीं। जैन ने कहा कि विभिन्न राज्य विधानसभाओं के स्पीकरों से उम्मीद थी कि वह न्यायिक न्यायाधिकरणों की तरह अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिकाओं पर फैसला करेंगे, लेकिन लंबे अनुभव से पता चलता है कि विभिन्न स्पीकर उन पार्टी की इच्छाओं और निर्देशों के आधार पर गए हैं जिस पार्टी के टिकट पर वह चुन कर आए थे।
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अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिकाएं हों समयबद्ध
जैन ने कहा कि अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिकाओं को 4 से 6 महीने की अवधि में तय करने के लिए समयबद्ध किया जाना चाहिए, जैसा कि हाल ही में 2 मामलों में राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने किया था। उन्होंने कहा कि कुलदीप विश्नोई के मामले में हरियाणा के तत्कालीन अध्यक्ष ने हरियाणा के 6 जनहित कांग्रेस विधायकों में से 5 को कांग्रेस में शामिल करने की वैधता तय करने में लगभग 4 साल लगा गए थे, जिन्हें बाद में उच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित कर दिया था। दूसरी ओर राजस्थान में अध्यक्ष ने सचिन पायलट और 19 अन्य विधायकों को 3 दिनों के भीतर अयोग्य ठहराए जाने की याचिका का जवाब देने के लिए कहा। दोनों स्पीकरों की कार्रवाई का फायदा कांग्रेस पार्टी को मिला, जिनके टिकट पर वे विधानसभा के लिए चुने गए थे।
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