भाजपा पार्षद राजेश कालिया चंडीगढ़ के नए और 25वें मेयर चुन लिए गए हैं, लेकिन बागी सतीश कैंथ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों का दोषी पाते हुए कैंथ को पार्टी से निकाल दिया गया है। हालांकि भाजपा ने उन्हें आखिरी मौका देते हुए मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले नाम वापस लेने को कहा था लेकिन वह नहीं माने।
सतीश कैंथ बने रहेंगे पार्षद
नगर निगम में एंटी डिफेक्शन लॉ (दलबदल कानून) लागू नहीं होता, इसलिए कोई भी पार्षद अगर पार्टी छोड़ता है या पार्टी उसे निकाल भी देती है तो उसकी सदस्यता पर फर्क नहीं पड़ता है। इसलिए पार्षद सतीश कैँथ की सदस्यता पर किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। वे पूरे कार्यकाल तक पार्षद बने रहेंगे। यह बात एडवोकेट सतिंदर सिंह ने बताई।
मेरी जीत हुई है: कैंथ
हारकर भी मैं जीत गया हूं। मुझे चुनाव में लोगों का स्नेह और प्यार मिला है। 2021 तक मैं पार्षद के रूप में लोगों के लिए काम करता रहूंगा। मैं कांग्रेस पार्टी और उनके सभी चारों पार्षदों का धन्यवाद करता हूं। साथ ही भाजपा के उन पार्षदोें का भी धन्यवाद, जिन्होंने मुझे वोट किया है। इन सभी लोगों ने शहर के अच्छे के लिए वोट दिया। नवनिर्वाचित मेयर राजेश कालिया को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं। मैं उन्हें सहयोग करता रहूंगा। मुझे लालच भी दिया गया लेकिन मैंने उसे ठुकरा दिया। शहर के कई लोगों से मुझे शुभकामनाएं मिली हैं। कांग्रेस की ओर से मुझे पार्टी में शामिल होने के लिए अप्रोच किया गया था, कांग्रेस ने मुझे मदद की इसके लिए उनका धन्यवाद।