फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रॉपर्टी डिटेल देने को उम्मीदवार हो जाएं तैयार

Mon, 22 Sep 2014 09:36 AM IST
राकेश भट्ट/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
इसे भाजपा की जिताऊ रणनीति का हिस्सा मानें या कुछ और... लेकिन यह सही है कि हरियाणा विधानसभा की घोषित सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की जारी सूची में धन्ना सेठों की भरमार है। खासकर एनसीआर में शहरी सीटों के नए उम्मीदवारों में ही इनकी संख्या ज्यादा है।
विज्ञापन


इसमें दूसरे दलों से आकर यहां पहली बार चुनाव लड़ने का मौका पाने वाले अधिकांश नेता प्रॉपर्टी या फाइनेंस के कारोबार से जुड़े हुए हैं। हरियाणा फतह करने के लिए भेजे गए दिल्ली भाजपा के हरियाणा में नियुक्त किए गए जिला प्रभारी बनाए गए नेताओं पर इस तरह की शिकायतें आने लगी हैं।

पहले विनोद शर्मा थे आगे
दूध दही के खाने के लिए मशहूर हरियाणा में राजनेताओं की संपत्ति भी चर्चा का विषय रहती है। कुछ वर्ष पूर्व विश्व की सबसे अमीर महिलाओं में शुमार रह चुकी सावित्री जिंदल यहां पर पिछले चुनाव वर्ष 2009 में संपत्ति के मामले में तीसरे नंबर थी।
विज्ञापन


पहले नंबर पर 87.40 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ अंबाला से लड़े विनोद शर्मा थे तो सिरसा से मैदान में उतरे गोपाल कांडा 63.15 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर थे, जबकि हिसार से सावित्री जिंदल 43.68 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर थी।

एडीआर रिपोर्ट में होगा खुलासा

देश के लोकसभा व विस चुनावों में नेताओं की संपत्ति व आपराधिक रिकॉर्ड पर मुख्य रूप से काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिकॉर्ड के सर्वे के बाद किस नेता पर कितनी संपत्ति का खुलासा होगा।

नेताओं के नामांकन दाखिल करने के दौरान दिए जाने वाले शपथ पत्र के आधार पर एडीआर के यह आंकड़े जारी होंगे, जो कि काफी दिलचस्प रहने की उम्मीद है।

इस बार पहली बार एक से अधिक अरबपति भी चुनाव लड़ेंगे। पिछले विस चुनावों के एडीआर के आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 90 में से 41, कांग्रेस के 90 में से 73,आईएनएलडी के 88 में से 54 उम्मीदवार करोड़ पति थे, जबकि अध्य्यन किए गए उम्मीदवारों पर पाया गया कि प्रति उम्मीदवार की औसत संपत्ति कांग्रेस में 5.59 करोड़, इनेलो में 3.42 करोड़ और भाजपा में 2.23 करोड़ रुपये थी।

प्रति व्यक्ति आय में हरियाणा है नंबर वन

ह‌रियाणा प्रति व्यक्ति आय में नंबर वन हो गया है यह भुनाने की तो हुड्डा सरकार जनता के बीच कोशिश कर रही है। लेकिन भाजपा ने ऐसे साधन संपन्न उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो प्रचार में गुटबाजी का कारण बनने के अलावा विपक्ष का हथियार बन सकते हैं। भाजपा के कुल 90 उम्मीदवारों की सूची में इस बार कुल 65 नए चेहरे हैं।

पार्टी के लिए वर्षों से कार्य कर रहे उम्मीदवारों के टिकट कटने की शिकायत टिकट वितरण कार्य निपटने के बाद आलाकमान के पास पहुंचने लगी है। दिल्ली भाजपा के कई नेता अलग-अलग जिलों के प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। ऐसे ही एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास पुराने नेताओं ने नए व धनाढ्य लोगों को टिकट वितरण की शिकायत करते हुए इसके पीछे का सच जानने की मांग की है।

गुड़गांव लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली नौ विधानसभा सीटों में से तीन उम्मीदवार नए हैं जो कि दो कुछ समय पूर्व ही भाजपा में आए हुए हैं। दो का प्रॉपर्टी का कारोबार और इनके पास पैसे की कमी नहीं है।

इसी तरह दिल्ली से सटे फरीदाबाद की दो सीटों पर पहली बार मैदान में उतरे बिल्डरों ने उम्मीदवारी पाई है। दो अन्य शहरी सीटों पर नामी स्कूल संचालक व कारोबारी ने टिकट पाया है। यहां पर चंदर भाटिया सहित कई पुराने नेताओं की उपेक्षा हुई।
विज्ञापन

नए चेहरे भी धन-बल के साथ मैदान में

पानीपत जिले की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष संजय भाटिया व सुरेंद्र अहलावत का टिकट कटना चर्चा में है। यहां पर पार्षद चुनाव में धन खर्च करने में प्रसिद्ध रहे चुके उम्मीदवार का चयन हुआ है तो समलखा से भी नया चेहरा धन बल के साथ मैदान में है। करनाल जिले की दो सीटों पर प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े दो नए चेहरों को मौका मिला है।

करनाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों के वितरण को लेकर वहां के सांसद पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। सोनीपत की बात करें तो मौजूदा विधायक को छोड़कर एक ठेकेदार, देश के जाने माने व्यवसायी की मां सहित सभी नए चेहरे मैदान में हैं।

यहां पर पार्टी ने अपने मजबूत नेताओं को दरकिनार कर दूसरे दलों से आए नेताओं पर दांव खेला है लेकिन यहां भी उम्मीदवार की जगह उसका पैसा चर्चा में है। 90 में से जिन 65 सीटों पर इसके अलावा जो नए उम्मीदवार उतारे गए हैं, उनमें खासकर शहरी सीट के उम्मीदवार धन बल को लेकर खासे चर्चित हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें