भाजपा में शामिल होने से पहले भी थे दोराहे पर
बीरेंद्र सिंह 42 साल कांग्रेस में रहे। 29 अगस्त 2014 को वह भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले कांग्रेस ने उनको ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा था। एक बार फिर से बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक जीवन ऐसे ही दौर से गुजर रहा है। उनके समर्थक सोमबीर पहलवान, शिवनारायण शर्मा और एडवोकेट जसबीर कुंडू ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब भाजपा छोड़ने का समय आ गया है, लेकिन आखिरी फैसला बीरेंद्र सिंह करेंगे। इसके अलावा रैली में आने वाली भीड़ पर भी यह फैसला छोड़ा जा सकता है।
भाजपा-जजपा गठबंधन ने बिगाड़े समीकरण
बीरेंद्र सिंह का मुख्य गढ़ उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र है। यहां से उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला विधायक हैं। भाजपा-जजपा का इस समय प्रदेश में गठबंधन हैं। बीरेंद्र सिंह, उनके बेटे सांसद बृजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक प्रेमलता बार-बार भाजपा-जजपा गठबंधन तोड़ने पर जोर दे चुके हैं, क्योंकि यदि गठबंधन में विधानसभा चुनाव हुए तो उचाना कलां से उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ही चुनाव लड़ेंगे और प्रेमलता को भाजपा का टिकट नहीं मिल सकता। अपनी पत्नी को भाजपा का टिकट दिलाने के लिए बीरेंद्र सिंह भाजपा पर दबाव बना रहे हैं। अगर भाजपा से अपने परिवार के लोगों को टिकट का पक्का आश्वासन नहीं मिला तो बीरेंद्र सिंह भाजपा को अलविदा कह सकते हैं।