चंडीगढ़ के लिए राहत की खबर है। यूटी में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। यूटी प्रशासन की तरफ से भेजे गए सभी पक्षियों के नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। गुरुवार को जालंधर से आई तीसरी रिपोर्ट के बाद पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
हालांकि अब चिंता की बात यह है कि चंडीगढ़ में अगर बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत नहीं हो रही तो आखिर इनकी मौत की असल वजह क्या है। विभाग अब मृत पक्षियों की क्लिनिकल टेस्टिंग करवाने पर विचार कर रहा है।
पशु पालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जालंधर की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चंडीगढ़ में मृत मिले किसी भी पक्षी में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं पाए गए हैं इसलिए शहरवासियों को डरने की जरूरत नहीं है। हालांकि यह अभी पुष्ट नहीं हो पाया है कि इन पक्षियों की मौत कैसे हुई है। प्राथमिक दृष्टि से लगता है कि पक्षियों की मौत ठंड की वजह से हुई है।
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पर्यावरण विभाग के निदेशक देबेंद्र दलाई ने कहा कि बर्ड फ्लू की रिपोर्ट का निगेटिव आना शहर के लिए अच्छा है। वहीं चंडीगढ़ में पक्षियों की मौत का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा कौए व कबूतर मर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वह किसी संक्रमण की वजह से मर रहे हैं। हालांकि इसकी पुष्टि क्लिनिकल टेस्ट के बाद ही हो सकेगी।
पर्यावरण विभाग के निदेशक ने कहा कि वह इस बारे में पशु पालन विभाग से बात करेंगे। हालांकि उन्होंने संतुष्टि जताई है कि 23 पक्षियों में से किसी में भी फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं।
अब तक शहर में 79 पक्षी मिले हैं मृत
चंडीगढ़ में भले बर्ड फ्लू के एक भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पक्षियों के मरने का सिलसिला बरकरार है। लगातार दसवें दिन गुरुवार को शहर के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरण विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर मृत पक्षियों के मिलने की सूचना मिलती रही। गुरुवार को 14 पक्षी मृत पाए गए।
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पर्यावरण विभाग के अनुसार गुरुवार को मनीमाजरा से एक कौआ, रेलवे स्टेशन से पांच कौए, कलाग्राम से चार कौए और एक वुडपेकर, सेक्टर-20 से एक कबूतर, सेक्टर-3 से एक कोयल और सेक्टर-42 से एक पक्षी के मृत मिलने की सूचना मिली। विभाग ने जालंधर जांच के लिए कुल 23 पक्षियों के नमूने भेजे थे, जिसमें से सभी की रिपोर्ट आ गई है। किसी भी पक्षी में बर्ड फ्लू के लक्षण नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि शहर में अब तक 79 पक्षियों की मौत हो चुकी है।