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12 घंटे में देखे 150 प्रजातियों के पक्षी, पंचकूलावासी को पहला ईनाम

Mon, 21 Mar 2016 09:12 AM IST
ब्यूरो्/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बर्ड वॉचर डॉ. अंकुर दीवान - फोटो : अमर उजाला
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यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन जब जुनून हो तो किसी भी हद को पार किया जा सकता है। कुछ ऐसा जज्बा और पक्षियों के प्रति प्रेम बर्ड रेस में देखने को मिला। चंडीगढ़ बर्ड क्लब की ओर से आयोजित बर्ड रेस में 11 अलग अलग ग्रुप बनाए गए। प्रत्येक ग्रुप में तीन से चार सदस्य थे।
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सभी को टिंबर ट्रेल भोजपुर से मोरनी, मिरजापुर डैम, सिसवा डैम, नेपली, कांसल, सुखना लेक, मोटेमाजरा और एयरोसिटी तक का एरिया दिया गया था।  सभी को इन स्थानों पर जाकर पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को अपने कैमरे में उतारना था। इसमें रफ ग्रुप ने बाजी मारी। ग्रुप के सदस्यों ने 12 घंटे के भीतर पक्षियों की कुल 150 प्रजातियां अपने कैमरे में कैद कीं।

ग्रुप के सदस्य डा. अंकुर दीवान ने बताया कि उनके ग्रुप ने मोरनी से शुरुआत की थी। उसके बाद सकेतड़ी, सुखना लेक और घग्घर बेल्ट से पक्षियों को कैमरे में कैद किया। दूसरे स्थान पर ईगल आउल ग्रुप रहा। दोनों के बीच कांटे की टक्कर थी। ईगल राउल ग्रुप ने पक्षियों की 149 प्रजातियों को कैद किया। ग्रुप में जसबीर, जतिंदर, कर्नल डा. भूपेश और भुनीश शामिल रहे।
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कई दुर्लभ प्रजातियां मिलीं
चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब के पास पक्षियों की 410 प्रजाति नोट थीं। इन पक्षियों के अलावा कोई नया पक्षी इस बार कैमरे में कैद नहीं हो पाया। हालांकि कई रेयर प्रजातियों को लोगों ने कैमरे में कैद किया। इसमें मुख्य रूप से अल्टरा मैरीन था, जिसे मोहित कोहली ने चक्की मोड़ के पास कैमरे में कैद किया।

उन्होंने बताया कि यह पहाड़ों का पक्षी है, लेकिन उन्हें चंडीगढ़ में पहली बार देखने को मिला। इसी तरह से उन्हें ग्रीन बीईटर भी मिला। यह अक्सर गर्मियों में देखने को मिलता है, लेकिन बिगड़ते पर्यावरण के कारण इस बार जल्दी देखने को मिला। इसी तरह से हिमालयी गिद्ध को भी कैमरे में कैद किया गया।

एयरोसिटी और मोटोमाजरा में पक्षियों की संख्या में गिरावट
अधिकतर ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि इस बार कई ऐसे इलाके थे, जहां पर काफी ज्यादा पक्षी देखने को मिलते थे, लेकिन इस बार वहां पर सिर्फ गिनती के दिखाई पड़े। खासतौर पर एयरोसिटी में। पानी की कमी के कारण वहां पर पक्षियों की संख्या काफी कम हो गई है। डा. अंकुर ने बताया कि प्रशासन को इस बारे में जरूर कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा मोटेमाजरा के तालाब में मछलियों का ठेका दे दिया गया है। ठेकेदार पटाखे फोड़ते हैं, जिससे पक्षियों ने आना बंद कर दिया है।

मैं कुछ दिन पहले सिक्किम गया था। वहां पर मैंने पक्षियों की 60 प्रजातियां देखीं। चंडीगढ़ में मुझे 130 से ज्यादा देखने को मिली। लेकिन सिक्किम में पक्षियों का घनत्व ज्यादा था। चंडीगढ़ में ऐसा नहीं है। इसका कारण यह है कि यहां पर नेचुरल जंगल खत्म हो रहे हैं। प्लांटेशन जंगल बढ़ रहे हैं। इसका प्रशासन को ध्यान रखना होगा।
- नरबीर काहलो, बर्ड वार्चर

पक्षियों की नई प्रजाति तो नहीं मिली, लेकिन कई दुर्लभ पक्षियों को कैमरे में कैद किया। बहुत अच्छा अनुभव रहा। सुबह छह बजे ही निकल गए थे। मैंने 130 से ज्यादा प्रजातियों को कैमरे में कैद किया। इनमें अल्टर मैरीन व ग्रीन बीइटर जैसे कई पक्षी थे।
- मोहित कोहली, बर्ड वार्चर

मैं सुबह सात बजे से निकल गया था। मैं शहर के भीतर रहा हूं। इसलिए मैंने रूटीन पक्षी ज्यादा कवर किए। बर्ड रेस का अनुभव काफी अच्छा रहा। चंडीगढ़ इससे बेहतर जगह नहीं हो सकती। साथियों ने भी काफी लुत्फ उठाया।
- प्रवण कुमार, बर्ड वार्चर

इवेंट पूरी तरह से सक्सेसफुल रहा है। कई बर्ड वार्चर सुबह पांच बजे मैदान में पहुंच गए थे। मैंने खुद 93 से ज्यादा पक्षियों को अपने कैमरे में कैद किया। मोटेमाजरा और चप्पड़चिड़ी में कई पक्षियों को कैद किया।
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- रीमा ढिल्लो, प्रेसिडेंट चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब
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