जैसे वह अंदर बरामदे में पहुंची देखा काफी हंगामा हो रहा है। वहां पर मौजूद मुलाजिम कैदियों को गालियां दे रहे थे। कुछ दूरी पर जेल डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के साथ, जिसे मुलाजिम धालीवाल साहब कह रहे थे, सुपरिंटेंडेंट भी खड़े थे। धालीवाल ने अचानक सुपरिंटेंडेंट को कहा कि ‘हुक्म करो अज्ज ऐना सारया नू बंदा बणाउंदे हां’।
जेल सुपरिंटेंडेंट ने धालीवाल और अन्य मुलाजिमों को गोली चलाने का हुक्म दे दिया। धालीवाल ने बंदूक से फायरिंग शुरू कर दी। उसे बरामदे में देख अजीत आया और मुझे अपने गले लगा लिया। इतना देखते ही धालीवाल के साथ खड़े अन्य मुलाजिम उसके बेटे को पकड़ कर अंदर ले गए। मेरे कुछ कहने से पहले धालीवाल ने अजीत सिंह के सीने में गोली मार दी।
वह मौके पर गिर गया और मौत हो गई। मेरा बेटा किसी हंगामे में शामिल नहीं था, इसके बावजूद उसे जानबूझ कर गोली से मौत के घाट उतारा गया है। डीसीपी अश्वनी कपूर का कहना है कि इस मामले की जांच एडीसीपी अजिंदर सिंह को दी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट पर पुलिस कमिश्नर आगे फैसला लेंगे।