वर्तमान में पंजाब में तीन प्रमुख नदियां हैं- ब्यास, सतलुज और रावी। झेलम व चिनाब अब ज्यादातर पाकिस्तान से होकर बहती हैं। सेंटर फाॅर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (सीएसई) की ओर से पिछले साल जारी रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि यूपी के बाद पंजाब दूसरे स्थान पर है, जहां की नदियों में 19 माॅनीटरिंग पॉइंट्स पर पानी में बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 30 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाया गया है।
एक लीटर में बीओडी की सामान्य मात्रा तीन मिलीग्राम होती है। यदि बीओडी इस मानक से अधिक है, तो इसका मतलब है कि पानी न केवल प्रदूषित है, बल्कि इसमें मौजूद ऑक्सीजन तत्व में कमी आ रही है। जब सीवेज व अन्य डिस्चार्ज से बड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पानी में मौजूद होते हैं, तो बैक्टीरिया द्वारा घुलनशील ऑक्सीजन का सेवन किया जाता है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के मुताबिक सतलुज व इसकी सहायक नदियों के किनारे स्थित करीब 18 शहर इसके पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। लुधियाना शहर में बुड्ढा नाला इतना अधिक प्रदूषित हो गया है कि जब इसका पानी सतलुज में जाता है, तो नदी का पानी ई ग्रेड में पहुंच जाता है। चिंता वाली बात यह है कि ई सबसे आखिरी ग्रेड माना जाता है। वहीं, नंगल में सतलुज में पानी की क्वालिटी बी ग्रेड है, जबकि यह कीरतपुर साहिब को पार करता है, तो पानी सी ग्रेड हो जाता है। ब्यास कुल मिलाकर ठीक है, लेकिन कुछ जगहों पर पानी प्रदूषित हो चुका है।
पीपीसीबी की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को कुछ दिन पहले भेजी रिपोर्ट के मुताबिक लुधियाना में बुड्ढा नाला का पानी सिंचाई योग्य नहीं है। नाले में विभिन्न जगहों से पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पानी में कोलीफार्म, बीओडी व सीओडी (केमिकल ऑक्सीडन डिमांड) की काफी तय मानकों से कई गुणा अधिक है।
बोर्ड के मुताबिक लुधियाना में करीब 300 डाइंग इंडस्ट्रीज हैं, जिनमें से 265 बुड्ढा नाला के कैचमेंट एरिया में पड़ती हैं। इंडस्ट्रीज से निकलने वाले वेस्ट पानी के उपचार के लिए हालांकि, 105 एमएलडी की क्षमता वाले तीन काॅमन एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगे हैं। सीईटीपी से निकलने वाला पानी बुड्ढा नाला में जाता है, लेकिन 54 डाइंग यूनिट भौगौलिक कारणों के चलते सीईटीपी से जुड़ नहीं सके हैं।
जनवरी 2024 में एनजीटी ने पीपीसीबी को बुड्ढा नाला में विभिन्न जगहों से पानी के सैंपल लेकर इनकी जांच रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीईटीपी से पानी सही तरीके से ट्रीट हो सके, इसके लिए इसे चौबीस घंटे चलाना जरूरी है। इसे चलाने पर भारी खर्चा आने के कारण ऐसा नहीं किया जाता है। हालांकि, बोर्ड समय-समय पर चेकिंग करके निगरानी रखता है।
एक सरकारी सर्वे के मुताबिक पंजाब में जमीन के नीचे पानी भी लगातार प्रदूषित होता जा रहा है। पानी में खतरनाक स्तर पर यूरेनियम, आर्सेनिक, क्रोमियम, कैडमियम और लेड की मात्रा पाई जा रही है। खास तौर से मानसा, संगरूर व फरीदकोट जिलों के भू-जल में काफी मात्रा में आर्सेनिक, वहीं बठिंडा, फिरोजपुर व मु्क्तसर में लेड, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, पटियाला व संगरूर में कैडमियम और मोगा, बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, लुधियाना, मुक्तसर, पटियाला व संगरूर जिलों के भू-जल में यूरेनियम पाया जा रहा है। माहिरों के मुताबिक इस प्रदूषित पानी के सेवन से कैंसर के अलावा अन्य कई जानलेवा बीमारियों होने का खतरा हो जाता है।
मालवा क्षेत्र में बिना ट्रीट किए नदियों में डाला जा रहा गंदा पानी: चेयरमैन
पीपीसीबी के चेयरमैन डाॅ. आदर्शपाल विग ने माना कि सतलुज, घग्गर व बुड्ढा नाला में प्रदूषण की काफी समस्या है। इसका बड़ा कारण सीवेज या शहरी कचरा है। उन्होंने बताया कि पंजाब में जितने ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, उनसे केवल 70 फीसदी सीवेज का ही उपचार हो पाता है। बाकी 30 फीसदी अनुपाचित ही नदियों व नालों में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल प्रदूषण रोकने के लिए बोर्ड लगातार प्रयासरत है। साथ ही लोगों को भी जागरूक होना होगा जो नदियों व नालों में कूड़ा फेंकते हैं।
सभी दल अपने घोषणा पत्रों में शामिल करें पानी में प्रदूषण का मुद्दा: सीचेवाल
राज्यसभा सदस्य व जाने-माने पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इस समय नदियों व भू-जल में बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसे शामिल करना चाहिए। लोगों को भी जागरूक होते हुए जब उनसे कोई प्रत्याशी वोट मांगने आए, तो उससे पहले सवाल करें कि पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या काम करेंगे। सीचेवाल ने कहा कि राजनीतिक इच्छा शक्ति से ही इस समस्या का हल हो सकता है। वरना आने वाली पीढि़यां साफ पानी के लिए तरस जाएंगी। उन्होंने माना कि राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते पीपीसीबी प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज के खिलाफ सही ढंग से कार्रवाई नहीं कर पाता था, लेकिन अब यह बंद किया गया है।
क्या कहते हैं राजनीतिक दल
कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. धर्मवीर गांधी का मानना है कि पंजाब की नदियों में प्रदूषण बड़ी समस्या है। इस समय की बड़ी जरूरत है कि बिना किसी देरी के एक व्यापक सफाई योजना चलाई जाए। आप के डाॅ. बलबीर सिंह का कहना है कि सरकारी प्रयासों के साथ यह भी जरूरी है कि पूरे समाज को भी इस गंभीर मुद्दे को लेकर जागरूक किया जाए। लोग भी नदियों को साफ रखें। भाजपा की उम्मीदवार परनीत कौर के मुताबिक चुनाव जीतने पर घग्गर दरिया की मार से पटियाला को बचाने के लिए इसकी साफ-सफाई के साथ मजबूती पर काम किया जाएगा। शिरोमणि अकाली दल के एनके शर्मा का कहना है कि पानी को आने वाली नस्लों के लिए बचाने को नदियों का साफ होना जरूरी है।