दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सेक्टर-पांच के मेला ग्राउंड में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
दूसरे दिन साध्वी वैष्णवी भारती ने महात्मय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण की कथा समाज के प्रत्येक व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। मौजूदा समाज की हर समस्या का समाधान इसमें है।
साध्वी ने कहा कि आत्मदेव की कथा में उसका परिवार है। पत्नी धुंधली, पुत्र धुंधकारी, गोकर्ण हैं। धुंधुकारी जो कुसंग के कारण अपने माता-पिता को दुख देता है।
पिता आत्मदेव इस व्यथा को सहन नहीं कर पाते और वन की ओर बढ़ जाते हैं। उसने मां धुंधली से धन की मांग की, माता ने पुत्र के दुष्कर्मों के कारण आत्महत्या कर ली।
एक व्यक्ति अपनी औलाद की खातिर सारी आयु अथक परिश्रम करता है। संस्कार हीनता के कारण संतान अपने कर्त्तव्य का अनुपालन नहीं कर रही। माता-पिता चार-चार संतानों को पोषित कर सकते हैं परंतु संतान वृद्धों को सहन नहीं कर सकती।
कभी हमारा देश संयुक्त परिवार प्रणाली में विश्वास रखता था, किंतु आज एकल परिवार की धारणा बन चुकी है। भारत ने विकास के लिए पश्चिम जगत के प्रबंधन के गुण को अपनाया और जापान ने अपनी संस्कृति को ध्यान में रखकर प्रबंधन की अपनी शैली और सिद्धांत से विकास करना उचित समझा। जापान में लोग संयुक्त परिवार में रहते हैं।