सुखदेव और राजगुरु के अलावा एक और ऐसा क्रांतिकारी भी था जो असेंबली में बम फेंकने के समय भगत सिंह के साथ था। उसकी अंतिम इच्छा यही थी कि उसकी मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि के निकट किया जाए।
हुआ भी यही, भारत-पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर स्थित शहीदी स्मारक (फिरोजपुर) में बीके दत्त की समाधि बनाई गई है। लेखक राकेश कुमार ने बताया कि बीके दत्त (बटुकेश्वर दत्त) और भगत सिंह के रिश्तों के बारे बहुत कम लोग जानते हैं।
दत्त का जन्म 18 नवंबर 1910 में गांव ओएरी खंडा घोष जिला बर्दमान (बंगाल) में हुआ था। 8 अप्रैल, 1929 को सेंट्रल असेंबली नई दिल्ली में पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिसप्यूट बिल पेश होने के दौरान भगत सिंह और बीके दत्त ने बम फेंका था। दत्त ने वहां नारा लगाया था इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद का नाश हो, दुनिया के मजदूरों एक हो। असेंबली बम कांड के बाद अदालत से दत्त को आजीवन निर्वासन की सजा मिली थी। दत्त को अंडमान दीप समूह (बंगाल की खाड़ी) स्थित काला पानी की सजा भी हुई थी।