चंडीगढ़। साइबर अपराधियों के जाल में न फंसें। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक ठग करीब आठ तरह से जाल में फंसा रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले ऑनलाइन निवेश, गूगल सर्च ठगी, ऑनलाइन निवेश, ऑनलाइन शॉपिंग, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और इंस्टाग्राम पर नौकरी का झांसा देने से जुड़े सामने आ रहे हैं। इसके अलावा व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करने की कोशिश तेजी से बढ़ी है। थोड़ी से जागरूकता से इनसे बचा जा सकता है।
साइबर क्राइम थाने की इंचार्ज ईरम रिजवी के मुताबिक चंडीगढ़ में हर बड़े ट्रैफिक पॉइंट पर अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं। सिनेमा घरों में मूवी शुरू होने से पहले साइबर जागरूकता संदेश चलाए जा रहे हैं। अधिकारी का कहना है कि लोग अगर टीवी और अखबार नियमित पढ़ें तो डिजिटल अरेस्ट जैसे झांसे में नहीं फंसेंगे।
इस साल 11 महीने में आईं 7650 शिकायतें
साइबर थाना पुलिस के अनुसार 2024 में 8,672 शिकायतें मिलीं, जिनमें 112 एफआईआर दर्ज हुईं और 88 आरोपी गिरफ्तार हुए। साल 2025 में 11 महीने में 7,650 शिकायतें आईं, जिनमें 133 केस दर्ज हुए और 141 आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं।
जानिए... दो साल में क्या कुछ हुआ शहर में
-बीते दो साल में साइबर अपराधियों ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। पुलिस ने इस वर्ष करीब 10 करोड़ रुपये फ्रीज करवाए।
-एक साल में 191 मोबाइल, 6 लैपटॉप, 6 सिम बॉक्स बरामद किए गए और ठगी में इस्तेमाल हुए 400 से अधिक मोबाइल नंबर ब्लॉक करवाए गए।
-जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने एक साल में 238 कार्यक्रम किए, जिनमें 27,337 छात्र और नागरिक शामिल हुए
एपीके फाइल न खोलें, पुलिसकर्मी खुद बन चुके हैं शिकार
-अगर व्हाट्सएप पर कोई एपीके फाइल भेजता है तो उसे बिल्कुल न खोलें। इसे डाउनलोड करते ही आपका पूरा मोबाइल एक्सेस ठगों को मिल जाता है। यदि नंबर आपके गूगल पे या बैंक खाते से लिंक है तो खाते से पैसे तुरंत उड़ा दिए जाएंगे। ठग इसी तरीके से चंडीगढ़ पुलिस के कई पुलिसकर्मियों को भी एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक कर चुके हैं।
एक साल में 18 डिजिटल अरेस्ट के मामले
इस साल चंडीगढ़ में अब तक 18 डिजिटल अरेस्ट सामने आ चुके हैं। पिछले एक हफ्ते में दो मामलों में ठगों ने 1.31 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। सभी पीड़ित 60 वर्ष से अधिक उम्र के रिटायर्ड और पेंशनर हैं। इनमें कई रिटायर्ड आर्मी अफसर भी शामिल हैं। जांच में पता चला कि अधिकांश पीड़ित स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल नहीं जानते थे और साइबर अपराध के तरीकों से अनजान थे।
जानिए... ठग कैसे फंसाते हैं डिजिटल अरेस्ट में
-ठग सबसे पहले कस्टम अधिकारी, पुलिस, ईडी, सीबीआई या आरबीआई का अधिकारी बनकर कॉल करते हैं।
-आप पर ड्रग्स सप्लाई या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है।
-ठग नकली पुलिस, जज और पूरा कानूनी सेटअप दिखाते हैं और बचाने के नाम पर ऑनलाइन बड़ी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं
इन बातों का रखें ध्यान
- व्हाट्सएप पर आई किसी भी एपीके फाइल को न खोलें।
- गूगल सर्च से बैंक या कस्टमर केयर नंबर न निकालें , फ्रॉड नंबर हो सकते हैं
- किसी अजनबी को स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति न दें।
- नौकरी, निवेश या ऑफर वाले इंस्टाग्राम/फेसबुक लिंक से बचें।
- कोई भी अधिकारी या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर केस नहीं बताती।
-फोन पर ओटीपी, यूपीआई, पिन या बैंक डिटेल कभी न बताएं।
7. ठगी का शक हो तो तुरंत नंबर ब्लॉक कर 1930 पर कॉल करें।