सेक्रेटेरियट पर नहीं सुरक्षा के इंतजाम
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यूटी सचिवालय की सुरक्षा में कई तरह की लापरवाही सामने आई है। सचिवालय के किसी भी गेट से कोई भी आसानी से आ जा सकता है। गुरदासपुर कांड के बाद भी प्रशासन सचेत नहीं हुआ है। केवल पिछले गेट से ही पब्लिक एंट्री का सिस्टम भी आज तक शुरू नहीं हो पाया है। इस सिस्टम को लागू करने के लिए प्रशासन ने अगले गेट पर बनी दोपहिया पार्किंग को भी बंद कर दिया। इसे बंद करने का मुख्य उद्देश्य यही था कि जनमार्ग की तरफ पिछले गेट पर ही वाहन पार्क हों और यहीं से सभी की एंट्री भी हो। इसके लिए पिछले गेट पर नया पास काउंटर तक बन चुका है। साथ ही अंडरग्राउंड पार्किंग की तरफ जाली लगाकर फेंसिंग कर दी गई है। लेकिन अभी तक नया एंट्री सिस्टम शुरू नहीं किया गया है। नया पास काउंटर भी नहीं खुल पाया है।
पहले पिछले गेट पर दो पुलिस कर्मी तक तैनात थे। दोनों पुलिस कर्मी हर आने जाने वाले पर नजर रखते थे। लेकिन सालभर से यहां कोई भी सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है। कोई किसी भी घटना को अंजाम देकर पिछले गेट से बिना रोक-टोक निकल सकता है। फ्रंट गेट भी खुला रहता है। जबकि पूर्व एसएसपी सिक्योरिटी मनीष चौधरी पुलिसकर्मियों को हमेशा आधा गेट बंद रखने के आदेश देते रहते थे। कई बार इसके लिए कर्मियों को डांट भी पड़ी।
एक किमी चक्कर लगाकर जाना पड़ता है जनमार्ग
अभी दोनों ही गेट से लोग सचिवालय में प्रवेश करते हैं। पिछले गेट से एंट्री करने वालों को पास बनवाने के लिए फ्रंट गेट पर ही जाना होता है। कोई भूल से फ्रंट गेट पर आ जाए तो उसे वाहन पार्क करने के लिए एक किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर पीछे जनमार्ग पर जाना पड़ता है।
25 लोगों की तैनाती नहीं हुई
सचिवालय की सुरक्षा के लिए चारों ओर 25 सुरक्षाकर्मी तैनात होने थे। नए सुरक्षाकर्मी तो दूर पुरानों की संख्या भी घट गई है। पिछले गेट पर पहले महिला और पुरुष दो सुरक्षाकर्मी होते थे अब एक भी नहीं है। अंदर इंप्लाइज लिफ्ट वाले ब्लॉक में एंट्री करने पर पूछताछ होती थी। लेकिन सुरक्षाकर्मी के सेवानिवृत्त होने के बाद एक ही सुरक्षाकर्मी दोनों तरफ की एंट्री देख रहा है।
कोट
मैंने कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया है। मेरे साथ ऐसा कोई कम्युनिकेशन नहीं हुआ है। सुरक्षा तो हर हालत में पुख्ता होनी ही चाहिए। मौके पर जाकर व्यवस्था जांची जाएगी।
- ईश सिंघल, एसपी सिक्योरिटी, चंडीगढ़।