पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह तारा की यूटी प्रशासन की ओर से दाखिल याचिका में खुद जिरह करने की मांग पर फिलहाल हाईकोर्ट ने फैसला नहीं लिया है। एमिकस क्यूरी के समय दिए जाने की अपील पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 2 अगस्त तक टाल दी। चंडीगढ़ प्रशासन ने चंडीगढ़ जिला अदालत के उस आदेश को खारिज करने की अपील की थी, जिसके तहत तारा को फोन पर परिजनों से बात करने की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट ने याचिका पर प्राथमिक सुनवाई करते हुए जिला अदालत के आदेशों पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को तारा को लीगल एड काउंसिल मुहैया कराने के निर्देश दिए थे। जिला अदालत के फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन की अपील याचिका पर तारा ने हाईकोर्ट को पत्र लिख खुद जिरह करने की अनुमति दिए जाने की मांग की थी, जिसका चंडीगढ़ प्रशासन ने पुरजोर विरोध किया।
तारा ने हाईकोर्ट को लिखे पत्र में कहा है कि वह अपने केस के लिए वकील की सेवाएं न लेकर खुद जिरह करना चाहता है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बेअंत सिंह की हत्या के दोषियों के लिए 29 सितंबर 1995 को अधिसूचना जारी कर उन्हें जेल से बाहर लाने पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। यही कारण रहा कि सीबीआई की विशेष अदालत जेल स्थित कोर्ट में सुनवाई करती थी।
प्रशासन की तरफ से चंडीगढ़ जिला अदालत के फैसले को खारिज करने की मांग की गई, जिसमें जगतार सिंह तारा को इस मामले में अपने सहयोगी आरोपियों से अलग से या एक साथ परामर्श करने की अनुमति दी गई। साथ ही तारा को अपने परिवार के साथ मोबाइल फोन पर अपने को डिफेंस को तैयार करने के लिए बातचीत करने की अनुमति दी गई थी।
अपील में कहा गया कि जिला अदालत ने तथ्यों की अनदेखी कर यह राहत दी, जिसे वापस लिया जाना चाहिए। आरोपी बेहद संवेदनशील मामले से जुड़े हैं और यह पूरी संभावना है कि दी गई सुविधाओं का दुरुपयोग किया जाएगा। ऐसे में ये सुविधाएं न दी जाएं।