अगर अपने एलआईसी से बीमा कराया है तो सावधान रहे। वरना आपके साथ भी वो होगा, जो इनके साथ हुआ। लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (एलआईसी) द्वारा एक पॉलिसी की मैच्योरिटी पर पूरा भुगतान न करने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने इसे सेवा में कोताही का दोषी पाया है। फोरम ने एलआईसी को आदेश दिए हैं कि वह पॉलिसी होल्डर को शेष रकम 21 हजार रुपये, 10 हजार रुपये बतौर मुआवजा और 7500 रुपये वाद खर्च दें।
साथ ही शेष रकम और मुआवजा राशि पर आदेश के एक महीने के अंदर भुगतान न करने पर ब्याज भी देने को कहा है। सेक्टर-23 निवासी सचिन यादव की ओर से फोरम में दायर वाद में कहा गया था कि उन्होंने अपने और पत्नी मुकेश कुमारी यादव के नाम से एलआईसी में दो पॉलिसी ली थी। इसके तहत तय समय में कोई अनहोनी होने पर इसे रिस्क कवर किया जाना था।
इस समय सीमा में कोई क्लेम न करने पर पॉलिसी के मैच्योरिटी पर 62,500 रुपये प्रति पॉलिसी दिए जाने थे, लेकिन एलआईसी ने उन्हें एक पॉलिसी का 41,115 रुपये और दूसरी का 40,866 रुपये दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि जब दोनों पॉलिसी एक ही थी, एक ही वक्त शुरू हुईं और एक वही वक्त पर मैच्योर हुई तो दोनों के अलग-अलग पैसे क्यों दिए गए।
इसके अलावा दोनों पॉलिसी में करीब 21-21 हजार रुपये कम दिए गए। इस पर उन्होंने फोरम में वाद दायर किया। वहीं प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर फोरम ने उन्हें सेवा में कोताही का दोषी पाया और शेष रकम मुआवजे के साथ चुकाने के आदेश दिए।