पंजाब में बासमती की फसल में इस बार 13 फीसदी इजाफा होने जा रहा है, लेकिन इसके खरीदार निर्यातकों ने बासमती की खरीद से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसके पीछे केंद्र सरकार की ओर से बासमती निर्यात मूल्य को कम करने के लिए तैयार न होना है। लिहाजा, महंगी बासमती खरीदकर कम मूल्य पर बेचने के लिए निर्यातक तैयार नहीं है।
एक ओर पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है तो दूसरी ओर उसकी तुलना में भारत से बासमती चावल के निर्यात में कमी देखी गई है। पाकिस्तान ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान ढाई अरब डॉलर का चावल निर्यात किया था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती सात महीनों में 2.2 अरब डॉलर का चावल निर्यात हो चुका है और लक्ष्य तीन अरब डॉलर से अधिक का है। इसका सीधा असर पंजाब पर हो रहा है।
निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान अरविंदरपाल सिंह ने कहा कि सरकार को तुरंत मूल्य सीमा हटा लेनी चाहिए और मुक्त व्यापार की अनुमति देनी चाहिए और वर्तमान परिदृश्य के अनुसार उत्कृष्ट मानसून के साथ, बासमती धान के किसान पंजाब, हरियाणा और अन्य आसपास के क्षेत्रों में जीआई टैग के तहत बंपर फसल की उम्मीद कर रहे हैं।
बासमती चावल की उपज का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है। इसकी पैदावार उपमहाद्वीप के खास क्षेत्रों में ही होती है। यहां पैदा होने वाले बासमती चावल का अलग जायका और खुशबू है। इसकी उपज का ऐतिहासिक क्षेत्र चिनाब और सतलुज नदियों के बीच का हिस्सा है। पाकिस्तान में सियालकोट, नारवाल, शेखूपुरा, गुजरात गुजरांवाला, मंडी बहाउद्दीन और हाफिजाबाद के जिले बासमती चावल की पैदावार के लिए जाने जाते हैं। दूसरी ओर भारत में पूर्वी पंजाब, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर के इलाकों में ऐतिहासिक तौर पर इसकी खेती की जाती रही है।
अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक भारत ने दुनिया के 100 से अधिक देशों को 52,42,511 मीट्रिक टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट किया। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक इतना बासमती चावल कभी भी एक्सपोर्ट नहीं किया गया था। अगर बीते वर्ष अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक की बात करें तो 45,60,762 मीट्रिक टन बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा था। यानी एक साल में ही 6,81,749 मीट्रिक टन अधिक चावल एक्सपोर्ट किया गया।