समाज को बदलना है तो सबसे पहले खुद में ही बदलाव लाना होगा। इस फसाने के साथ 26 साल के अजय शहर दर शहर नंगे पांव पैदल घूम रहे हैं। बालश्रम व भिक्षावृत्ति के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से संबंध रखने वाले अजय ने होटल मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की है और फिलहाल पीएचडी कर रहे हैं। नंगे पांव घूमना अजय के उस प्रतिज्ञा का हिस्सा है जो उन्होंने अपने आप से की है।
जब अजय ने भीख मांगने वाले बच्चों को नंगे पैर चलते देखा तो उन्होंने भी जूते-चप्पल पहनना छोड़ दिया और लोगों को जागरूक करने निकल पड़े। अपनी 14वीं यात्रा के दौरान मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे अजय ने बताया कि गरीब बच्चों को शिक्षित करना उनका जुनून है। वह अब तक 7 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। कुल 80 हजार किमी का सफर तय किया है, जिसमें साढ़े बारह हजार किमी पैदल चले हैं।
अजय ने बताया कि साल 2015 से पहले उनका इवेंट मैनेजमेंट का बिजनेस था, जिसका सालाना टर्नओवर 43 लाख का था। लेकिन एक वाक्या ने उन्हें सबकुछ छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अजय ने बताया कि वह पिथौरागढ़ में घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी नाम से एक एनजीओ चलाते हैं। एनजीओ के द्वारा वह 14 हजार बच्चों को शिक्षा मुहैया करा चुके हैं।
जिले में अब तक कई बच्चों को वे बाल श्रम और भिक्षावृत्ति से मुक्त करा चुके हैं। उन्होंने अब अपने अभियान का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने नंगे पांव पैदल यात्रा शुरू की।