कहते हैं किसी के लिए कुछ करने में जितना सुकून मिलता है, किसी और काम में नहीं मिलता। ये बात बिल्कुल सटीक बैठती है, अशोक मित्तल पर। 62 वर्षीय अशोक कुमार मित्तल दिव्यांगों के लिए किसी सहारे से कम नहीं है। वे दिव्यांगों को पैरों पर खड़ा करने में मदद करते हैं। वह अब तक सैकड़ों लोगों को ट्राइसाइकिल, व्हील चेयर, वॉकर बांट चुके हैं। अशोक मित्तल पिछले कई सालों से समाज सेवा कर रहे हैं।
वह पंचकूला के सेक्टर 2 में रहते हैं और उनका झूलों का बिजनेस है। इसी कमाई से वह जरूरतमंद लोगों की सहायता करते हैं। रक्तदान शिविर हो या फिर किसी मजबूर की मदद करनी हो, वह कभी पीछे नहीं हटते। हर सामाजिक कार्य में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। कई बार तो प्रशासन भी उनकी मदद लेता है। उनका कहना है कि मजबूर और गरीब व्यक्तियों के लिए उनके दरवाजे हमेशा के लिए खुले हैं।
एक्सिडेंट के बाद एहसास हुआ
मित्तल ने बताया कि साल 2005 में उनका एक्सिडेंट हो गया था। वे पीजीआई में दाखिल रहे। पीजीआई में जब एक्सिडेंट से घायल मरीज आते थे तो देखा नहीं जाता था। कई तो ऐसे होते थे जिनका कोई नहीं होता था। वे काफी दिनों तक पीजीआई में पड़े रहते थे। बाद में जब उन्हें छुट्टी मिलती थी तो उन्हें चलने के लिए कोई भी सहारा नहीं मिलता था। तभी मैंने निर्णय लिया कि जब तक जान है, तब तक दिव्यांगों की मदद करते रहेंगे।
बच्चियों को सिलाई मशीन भी मुफ्त में देते हैं
अशोक उन बच्चों को भी समाज में आगे बढ़ाने का काम करते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। उन्होंने अपनी मां के नाम पर श्रीमती विद्यवती सिलाई केंद्र व श्रीमती विद्यावती कंप्यूटर सेंटर खोला है। इसमें सिलाई-कढ़ाई और कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है। एक बैच में 30-35 लड़कियां होती हैं। पहली तीन बच्चियां, जो इसमें पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर होती हैं, उन्हें मुफ्त में सिलाई मशीन दी जाती है।
अब तो मिशन बन चुका
उन्होंने कहा कि समाजसेवा करना अब उनका मिशन बन चुका है। उनका मुख्य उद्देश्य दिव्यांग खासकर बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्य धारा में लाना है। उनका मुख्य व्यवसाय झूले का है। वे ट्राइसिटी व अन्य जगहों में प्रदर्शनी के दौरान झूले लगाते हैं। इससे जो भी कमाई होती है, उसके एक हिस्से का इस्तेमाल समाजसेवा में करते हैं। रक्तदान शिविर में लोगों को जागरूक करने के लिए वह हर संभव मदद करते हैं।