कहते हैं दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य का काम किसी की गृहस्थी बसाना है। हर परिवार में छोटी-छोटी बातों पर नोक झोंक तो होती ही रहती है। इससे पहले कि परिवार की छोटी-छोटी बातें कोई बड़ा मुद्दा बने और अदालत में जाए उससे पहले ही सिटी ब्यूटीफुल की महिला न्याय समिति अपने स्तर पर उन मुद्दों को सुलझाने में जुट जाती है।
1985 से काम कर रही यह समिति अब तक तीन हजार से ज्यादा लोगों के लड़ाई झगड़ों को सुलझाकर उनका घर बसा चुकी है। समिति की प्रधान सतिंदर धवन ने केवल 5 महिलाओं के सहयोग से इस समिति का निर्माण किया था। धीरे-धीरे इनकी समिति में और महिलाएं भी शामिल होना शुरु र्हुइं और अब 15 से ज्यादा महिलाएं इस समिति की सक्रिय सदस्य हैं।
घर के आपसी मतभेद और समस्याओं से पीड़ित ट्राईसिटी के लोग अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले इस समिति में जाते हैं और अपना पक्ष रखते हैं। प्रधान सतिंदर धवन बताती हैं कि हमारी प्राथमिकता यह रहती है कि म्यूचल अंडरस्टैंडिंग से इन मामलों को निपटाया जा सके। ट्राईसिटी समेत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के लोग भी न्याय के लिए यहां आते हैं
समिति की प्रधान सतिंदर धवन ने बताया कि हमारी समिति में ट्राईसिटी के ही नहीं बल्कि पंजाब, हरयिाणा, हिमाचल, जींद रोहतक से भी घरेलू हिंसा के केस आते हैं। किसी से भी किसी भी प्रकार की फीस चार्ज नहीं की जाती। हर शनिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक हम दोनों पक्षों की बातें सुनते हैं और उसके बाद उनकी काउंसलिंग करते हैं।
दुष्कर्म पीड़ितों के शिक्षा का खर्च भी समिति उठाती है
घरेलू हिंसा के अलावा रेप के मामले बहुत ज्यादा होते हैं। समिति रेप से पीड़ित लड़कियों की शिक्षा का खर्च भी उठाती है। यहीं नहीं यह संस्था 300 से अधिक विधवाओं को पेंशन भी दिला चुकी है। समिती से जुड़ी महिलाओं को कानूनी जानकारी देने के लिए समिति की ओर से हर महीने वर्कशॉप का आयोजन किया जाता है जिसमें महिला वकील आकर सब को कानूनी जानकारी देती हैं।