कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो चुपचाप बेसहारा व मजबूर लोगों की मदद करते हैं। कोई ढिंढोरा नहीं पीटते। ऐसी ही एक दानवीर महिला हरभजन कौर हैं। आमतौर पर दानियों के बारे में शहरवासियों को पता होता है, मगर हरभजन कौर के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मार्कफेड से रिटायर होने के बाद हरभजन कौर पीजीआई को अब तक 22 लाख रुपये दान में दे चुकी हैं। इससे करीब 37 मरीजों को इलाज में मदद मिली है। मरीजों की लगातार मदद करने पर पीजीआई उन्हें सोमवार को फाउंडेशन डे पर सम्मानित करने जा रहा है। चंडीगढ़ के सेक्टर-45 सी में रहने वाली हरभजन कौर ने बताया कि वे बचपन से ही बेसहारा लोगों की मदद करती आई हैं।
वे खासतौर उनकी मदद करती हैं, जो पढ़ाई कर कुछ बनना चाहते हैं। उनके मुताबिक करीब 20 गरीब बच्चे ऐसे थे, जो रुपयों के अभाव में आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। हरभजन कौर को जब पता चला तो उन्होंने आगे बढ़कर उनकी मदद की। श्री गुरु गोविंद सिंह कालेज आफ फार्मेसी के 53 स्टूडेंट की करीब चार लाख की फीस भरी। इसके अलावा उन्होंने मोहाली के दो फिजियोथैरेपी सेंटर में मशीनों की खरीद के लिए रुपये उपलब्ध कराए। इसके अलावा होशियारपुर के मूनक कलां गांव व जलोवाल की 15 विधवाओं को हर महीने 500 रुपये पेंशन के तौर पर देती हैं।
हरभजन कौर ने बताया कि वे बचपन से ही लोगों की मदद करती आई हैं। उनके दादा ज्ञानी ज्ञान सिंह बड़े धर्मात्मा थे। उनकी शिक्षा-दीक्षा का हरभजन कौर पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा उन पर गुरुबाणी का भी काफी असर रहा है। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट के दौरान जो भी उन्हें भी पैसा मिला था, वह सारा पैसा लोगों की मदद पर लगा दिया है। जब भी कोई उन्हें पुकारता है, वे वहां पर पहुंच जाती हैं और दिल खोलकर पीड़ितों की मदद करती हैं।