पिछले चार साल भारतीय बैंकिंग के लिए काफी बुरे साबित हुए हैं। 2010 से लेकर 2013 तक 29 हजार 910 करोड़ रुपये का बैंक फॉड हुआ है।
फ्रॉड के मामले अभी तक सुलझ नहीं पाए हैं, इसका बैंकों को सीधा नुकसान हुआ है।
इतना ही नहीं, विश्व के 50 टॉप बैंकों की सूची में अभी तक कोई भी भारतीय बैंक जगह नहीं बना पाया है, जबकि पड़ोसी मुल्क चीन के पांच बैंक इस सूची में शामिल हैं।
चंडीगढ़ में प्रोग्रेसिव लायर्स फोरम द्वारा आयोजित सेमीनार में बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने यह खुलासा किया है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल ने बैंक अधिकारियों को आश्वस्त किया है।
भारतीय बैंकों की चुनौतियों से निपटने के लिए कानून के तहत पूरी मदद की जाएगी। सेमीनार में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
पंजाब एवं सिंध बैंक के महा प्रबंधक इकबाल सिंह भाटिया ने कहा कि बदलते दौर के साथ भारतीय बैंकों में भी चुनौतियां बढ़ रही हैं।
सरकारी नीतियों से लेकर तकनीकी दिक्कतें बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर बैंकिंग कार्यप्रणाली में देखने को मिल रहा है।
हालात यह हैं कि सार्वजनिक बैक को आरबीआई से 3,69,153 करोड़ की मदद की दरकार है, ताकि बैंकों को होने वाले नुकसान की क्षति पूर्ति की जा सके।
उन्होंने कहा कि आरबीआई बैंकों को उभारने में पूरी मदद कर रहा है और बैंकों के लिए फाइनेंशियल मार्केट तक विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट का फायदा बैंकों को मिलेगा, चूंकि 1.2 बिलियन लोगों को आधार कार्ड के जरिए लाभ दिया जाएगा।
इसके लिए लोगों को बैंक अकाउंट खोलना जरूरी है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जनरल मैनेजर केके तनेजा ने भी महंगाई और रिसेशन के दौर को बड़ी चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि अब बैंकिंग कामकाज ग्लोबली हो गए हैं और किसी दूसरे मुल्क में छाई मंदी का असर सभी बैंकों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि क्रास बार्डर ट्रांजेक्शन से बैंकों को नुकसान हो रहा है। वहीं, एटीएम की क्लोनिंग और एटीएम आउटलेट्स में असुरक्षा का असर भी बैंकों को पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। इस मौके पर रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता और कई प्रतिष्ठित बैंकों के शीर्ष के अधिकारी उपस्थित थे।
भारत में अभी 9 फीसदी लोग ही कर रहे एटीएम का इस्तेमाल
पंजाब एवं सिंध बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक भारत में अभी तक 9 फीसदी लोग ही एटीएम को प्रयोग में ला रहे हैं। जबकि न्यूयॉर्क में यह संख्या 60 फीसदी है।
यह कोशिश की जा रही है कि 2016 तक भारत के हर नागरिक का एकाउंट हो। बैंकों द्वारा जागरूकता अभियान छेड़े गए हैं और हर रोज हजारों उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ा जा रहा है।