किराए पर बैंक खाते लेकर ठग उस खाते में आपके खून पसीने की कमाई ट्रांसफर कर ऐश कर रहे है। ठगों ने अब आपको लूटने का नया तरीका अपनाया है। जिस तरह लोग रेंट पर मकान ले कर रहते है उसी तरह ये फ्रॉडस्टर भोले भाले लोगों का खाता किराए पर इस्तेमाल करते हैं और जब इनका मकसद पूरा हो जाता है तो ये उस खाते को भूल जाते हैं। किराए पर इस्तेमाल हो रहे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। खाता किसी के नाम पर होता है और इस्तेमाल कोई दूसरा किराया देकर कर रहा होता है।
म्यूल अकाउंट के लिए रुरल एरिया के लोगों को निशाना बनाते है
चंडीगढ़ पुलिस के साइबर एक्सपर्ट मनप्रीत ने बताया कि म्यूल अकाउंट लेने के लिए ठग रूरल एरिया के कम पढ़े लिखे लोगों को अपना निशाना बनाते है। भोले भाले लोगों को अपनी मजबूरी बता कर उनके बैंक खाते में ट्रांजेक्शन शुरू कर देते है और महीने में 3 से पांच हजार रुपये देते रहते हैं। इस तरह अकाउंट भी फर्जी नहीं होता है और फंसने का कोई डर भी नहीं होता। अगर कोई फंसेगा भी तो जिसका खाता है वह।
पैसा या आरोपी में से एक ही हाथ आता है
साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो ज्यादातर ऑनलाइन फ्रॉड में आरोपी या पैसा एक ही चीज हाथ आती है। क्योंकि पैसा किसी और शहर में खुले खातों में ट्रांसफर होता है । जबकि आरोपी किसी दूसरे शहर में बैठा पैसा ट्रांसफर कर रहा होता है। पैसा और आरोपी दोनों अलग अलग ट्रेवल करते हैं।
आउटसोर्सिंग एजेंसियों से डाटा लीक होता है
जानकारों का कहना है कि लोगों के खातों और अन्य की डिटेल बैंकों की आउटसोर्सिंग एजेंसियों से ही लीक होती है। तभी फ्राडस्टर्स पूरी डिटेल के साथ लोगों को फोन करते हैं और लोग उनकी बातों में आकर अपने एटीएम की डिटेल दे देते है। इसके बाद एटीएम कार्ड क्लोन कर आपके खाते से पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं या शॉपिंग की जाती है।
दो दिनों में शिकायत पर पैसा वापस मिलने के चांस ज्यादा
साइबर एक्सपर्ट मनप्रीत का साफ कहना है कि अगर पीड़ित व्यक्ति फ्रॉड होने के दो दिन के अंदर साइबर सेल में शिकायत दे देता है तो उसकेपैसे वापस मिलने के चांस ज्यादा होते हैं। क्योंकि ज्यादातर केसों में देखा गया है कि लोगों से डिटेल ले कर ठग शॉपिंग ही करते है । शांपिंग के लिए जो सामान का आर्डर किया होता है उसके पहुंचने में तीन दिन का समय लगता है तो इस तरह अगर फ्रॉड का जल्दी पता लग जाए तो उस सामान की डिलीवरी को रुकवाया जा सकता है।
ठगी होने के छह महीने बाद भी से वापस करवाए
किस्मत अच्छी हो तो पैसा छह महीने बाद भी मिल सकता है। ऐसे ही एक मामले में सेक्टर 43 के सुधीर सिंह से फोन पर एटीएम की डिटेल लेकर उनसे 2 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी हुई थी। सुधीर ने ठगी होने के छह महीने बाद साइबर सेल में मामले की शिकायत इस साल जुलाई में दी थी । शिकायत मिलने के एक महीने में साइबर सेल ने मामले की जांच कर सुधीर का करीबन दो लाख रुपया वापस दिलवा दिया था। साइबर एक्सपर्ट मनप्रीत ने बताया कि उन्होंने जहां जहां से पैसा गया वो सारी डिटेल निकाली। कंप्यूटर से आईपी एड्रेस से शहर का पता लगाया गया जहां पैसों का ट्रांजेक्शन हुआ। उसके बाद आखिरी बार जिस खाते में पैसा आया उसका पता लगाकर उसको जिम्मेदार बनाया गया और उससे उसी रास्ते जहां जहां से पैसा आया था उसी रास्ते से से करीब दो लाख रुपया वापस करवाया ।
साल दो साल में ठगी के ट्रेंड बदलते रहते हैं
साइबर एक्सपर्ट के मानें तो फ्रॉड करने वाले एक-दो साल बाद ठगी करने केतरीके बदल देते हैं। कुछ साल पहले तक लोगों को फर्जी ईमेल के जरिए लॉटरी निकलने का झांसा देकर ठगी करते थे । अब फोन कॉल्स कर ठगी कर रहे हैं। जब लोग इन फोन काल्स के प्रति जागरूक हो जाएंगे तब ये कुछ और ट्रेंड अपनाएंगे।
एक साल में एटीएम फ्रॉड के 40 मामले आए
इस साल यूटी पुलिस के साइबर सेल के पास फर्जी बैंक कर्मचारी बनकर एटीएम फ़्रॉड करने वाली 40 मामले आ चुके हैं। जबकि साल 2014 में सिर्फ 9 शिकायतें ही पुलिस के पास पहुंची थी। पुलिस का और बैंकों का साफ कहना है कि उनकी तरफ से कभी फोन पर कभी कोई जानकारी नही मांगी जाती। इसलिए लोगों की सावधानी में ही मात्र बचाव है ।