यूटी प्रशासन ने 27 सितंबर 2019 को अधिसूचना जारी कर शहर में एकल-उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल और बिक्री पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से इसकी बिक्री और इस्तेमाल हो रहा है। अमर उजाला ने जब प्रतिबंध का असर देखने के लिए बाजारों का दौरा किया तो पाया कि एक साल बाद भी स्थिति जस की तस है।
यूटी प्रशासन ने पिछले साल 12 सितंबर को लाखों रुपये खर्च कर सेक्टर-17 के प्लाजा में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत ‘प्लास्टिक फ्री चंडीगढ़’ अभियान की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम में प्रशासन के सभी अधिकारियों और लोगों ने चंडीगढ़ को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ ली थी। इसके 15 दिन बाद प्रशासन ने अधिसूचना जारी कर शहर में एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया।
अगर कोई इसका इस्तेमाल करता पाया गया तो उस पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया। दो अक्टूबर 2019 को भी शहर के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के दावे किए गए लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन अधिसूचना जारी कर भूल गया है।
प्रतिबंध के बावजूद शहर की दुकानों में पॉलीथिन बैग का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। दुकानदार तो छोड़िए, पॉलीथिन की सप्लाई करने वाले व्यापारियों पर भी प्रतिबंध का कुछ खास असर नहीं है।
मंडियों में पॉलीथिन में खुलेआम बेचे जा रहे सामान
शहर की मुख्य मार्केट सेक्टर-26 स्थित सब्जी मंडी व अनाज मंडी में खुलेआम पॉलीथिन में सामान बेचा जा रहा है। इसके अलावा पथ विक्रेता (स्ट्रीट वेंडर), छोटे बाजार, कालोनियों और गांवों में इनका काफी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। अमर उजाला ने पाया कि बड़े रिटेल स्टोर संचालकों ने पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगने की अधिसूचना जारी होने के बाद पॉली बैग दुकानों से हटा दिए हैं।
वे ग्राहकों को पॉली बैग के स्थान पर डिस्पोजेबल बैग में सामान दे रहे हैं। नगर निगम का एमओएच विभाग अभियान चलाकर एकल-उपयोग प्लास्टिक और पॉलीथिन के इस्तेमाल पर चालान काटता है। अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक करीब 400 लोगों के चालान काटे गए है। यह चालान कोरोना से पहले काटे गए थे।
फैक्टरी पर प्रतिबंध, पांच साल की जेल या एक लाख का जुर्माना
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई भी इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, उसे अधिकतम पांच साल की सजा या एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत कोई भी व्यक्ति जो इन आदेशों का पालन नहीं करेगा उसकी फैक्ट्री आदि पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके अलावा पानी की सप्लाई व बिजली कनेक्शन या फिर कोई अन्य सेवाएं रोकी जा सकती हैं। बावजूद इसके चंडीगढ़ में इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इन पर है प्रतिबंध
- पानी की एक लीटर से छोटी बोतल
- प्लास्टिक के ग्लास
- थर्मोकोल के गिलास
- प्लास्टिक या थर्मोकोल की प्लेट
- पॉलीथिन, प्लास्टिक बैग, कैरी बैग
- पानी के सील्ड गिलास
- एक बार इस्तेमाल होने वाले रेजर, पेन व स्टेशनरी
- पैकिंग शीट, पार्टी ब्लूपर्स, प्लास्टिक रिबन
- खाद्य और तरल वस्तुओं की पैकेजिंग व कवरिंग के प्लास्टिक
- 250 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक कंटेनर जैसे- दही, खीर, आइसक्रीम आदि
- 50 मिली व 50 ग्राम की पैकेजिंग क्षमता वाले प्लास्टिक के पाउच
- ईयर बड्स, गुब्बारे, झंडे और कैंडी के लिए प्लास्टिक की छड़ें
- प्लास्टिक रिफिल पाउच जिसमें मात्रा 500 मिली से कम हो
- टेट्रा पैक के साथ जुड़ी स्ट्रॉ
- फूड व स्नैक्स पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मल्टीलेयर पैकेजिंग
पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर समय-समय पर अभियान चलाकर चालान काटे गए हैं। सीपीसीबी, पुलिस समेत कई विभाग इसके लिए चालान काटते हैं। कोविड की वजह से कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य कामों में लग गई थी लेकिन अब सोमवार से फिर से इसके लिए चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- डॉ. अमृतपाल सिंह वड़िंग, एमओएच