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कांग्रेसी नेता शिंगारा को कोर्ट से जमानत, बेटों की गिरफ्तारी पर रोक

Fri, 30 Sep 2016 10:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेसी नेता शिंगारा सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब नेशनल बैंक की 14 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा जमाने से जुड़े मामले में आरोपी फतेहगढ़ साहिब के कांग्रेसी नेता शिंगारा सिंह को सेशन कोर्ट से शुक्रवार को नियमित जमानत मिल गई। वहीं मामले में सह आरोपी निजी टीवी चैनल मालिक लाभ सिंह अहलुवालिया की अग्रिम जमानत अर्जी सुनवाई के बाद सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दी।
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वहीं उसके दोनों बेटों इकबाल सिंह और गुरप्रीत सिंह को 7 नवंबर तक अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। साथ ही दोनों को पुलिस इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन करने को कहा है। इससे पहले एसीजेएम कोर्ट से शिंगारा सिंह की जमानत अर्जी खारिज हो गई थी। शिंगारा सिंह की ओर से दायर जमानत अर्जी में कहा गया था कि उनके पास 2010-12 से कोठी की पॅजेशन है।

शिंगारा ने कोठी को 4 करोड़ रुपये में खरीदने का दावा किया था। साथ ही उनके पास एग्रीमेंट टू सेल होने की भी बात कही थी। शिंगारा के पास से पंजाब नंबर की गाड़ी भी बरामद हुई थी जो लाभ सिंह अहलुवालिया के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस पूछताछ में उसने तीनों सह-आरोपियों के नामों का खुलासा किया था। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया था। मामला र्दज होने के बाद से तीनों फरार हैं।
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ये है मामला

कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-27 स्थित एक कोठी के मालिक ने 17 दिसंबर 2013 को पीएनबी से कोठी के बदले 13.15 करोड़ रुपये का लोन लिया था। कुछ समय बाद उन्होंने बैंक की किस्त चुकानी बंद कर दी और लोन न चुकाने की स्थिति पर उन्होंने 15 दिसंबर 2015 को प्रॉपर्टी बैंक को सरेंडर कर दी। बैंक ने प्रॉपर्टी का पॅजेशन ले लिया।

साथ ही 29 फरवरी 2016 को कर्जदार को लोन चुकाने के लिए आखिरी मौका देते हुए 60 दिनों में ब्याज समेत 13,80,91,376 रुपये चुकाने को कहा। कोठी मालिक बैंक का कर्ज नहीं चुका पाया तो बैंक ने प्रॉपर्टी में ताला लगा दिया। बैंक की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया था कि सेक्टर-27 की कोठी पर बैंक के लगे ताले को तोड़ शिंगारा सिंह ने उस पर अपना कब्जा कर लिया है।

बैंक ने शिंगारा से संपर्क किया तो उन्होंने उस पर जिला अदालत से स्टे के आर्डर दिखाए। इस पर बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने शिंगारा के कब्जे को गलत पाते हुए उनके खिलाफ केस दायर करने का आदेश दिया था। इस पर यूटी पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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