गेहूं की खरीद में भी किसानों को अदायगी का पंगा पड़ सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार ने सीसीएल की पहली किस्त के लिए अब तक मंजूरी नहीं दी है।
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इससे पहले धान की खरीद में भी यही समस्या आई थी। गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल-15 से प्रस्तावित है। इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसके लिए 14 हजार करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट की पहली किस्त अप्रूव कर दी है।
यह किस्त अप्रैल माह में किसानों को पेमेंट के लिए है, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है। मंत्रालय का कहना है कि पंजाब सरकार के पुराने अकाउंट में कुछ फर्क आ रहा है।
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पंजाब मंडी बोर्ड के वाइस चेयरमैन रविंदर चीमा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को मंजूरी के लिए पत्र लिखा गया है।
जल्द ही वहां से सूचना आने के बाद बैठक की उम्मीद है। गौरतलब है कि पिछले साल धान की खरीद में भी यही समस्या आई थी। केंद्र ने कैश क्रेडिट लिमिट पर तीन बार रोक लगाई थी।
आखिरकार तब राज्य सरकार की ओर से काफी पैरवी करने के बाद राशि जारी हुई। इसके चलते कई दिन किसानों को धान की अदायगी नहीं हो सकी थी। इस बार भी फिलहाल ऐसे हालात बनते नजर आ रहे हैं।
खराब मौसम से घटेगा उत्पादन
इस बार गेहूं की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। गेहूं का रकबा 35 लाख हेक्टेयर है, लेकिन बारिश, तेज हवाओं और ओलों से काफी फसल खराब हुई है। अभी तक 5% नुकसान का अनुमान है। 29-31 मार्च तक फिर मौसम खराब होने का अनुमान है।
इससे फसल का नुकसान और बढ़ सकता है। पहले 1.20 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य था, अब 1.15 करोड़ टन गेहूं मंडियों में आने की उम्मीद है। यह आंकड़ा और भी कम हो
पंजाब ने मांगा 717 करोड़ का मुआवजा पंजाब सरकार ने फरवरी-मार्च में मौसम की मार से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से 717 करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है। राज्य के खेतीबाड़ी कमिश्नर डॉ. बलविंदर सिद्धू ने मामले में केंद्रीय कृषि व सहकारिता सचिव को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि 294177 हेक्टेयर रकबे में फसलों को नुकसान हुआ है।
2.60 लाख हेक्टेयर रबी की फसल को हुए नुकसान का अनुमान 628 करोड़ रुपये है। इसी प्रकार 24 हजार हेक्टेयर के चारा फसल के नुकसान का अनुमान 46 करोड़, 10,177 हेक्टेयर बागवानी फसल को हुआ नुकसान 43 करोड़ है। पूरी तरह बर्बाद फसलों के लिए किसानों को 3600 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाता है, जो उचित नहीं है। इसे दस हजार रुपये किया जाना चाहिए।
पूरे पंजाब में लोडिंग रेट समान राज्य सरकार ने गेहूं खरीद से पहले लोडिंग पर विवाद सुलझाने का दावा किया है। पहले राज्य में गेहूं की लोडिंग के रेट अलग-अलग होते थे। जोकि 1.25 रुपये से 2.50 रुपये प्रति बोरी थी।
ढाई रुपये वाले बिल भी कई वर्षों से क्लियर नहीं हो रहे थे। पिछले दिनों हुई मंडी बोर्ड और आढ़तियों की बैठक में फैसला किया गया है कि अब पूरे राज्य में लोडिंग का रेट 1.50 रुपये प्रति बोरी होगा।
15 अप्रैल से खरीद शुरू हुई तो आएगी बारदाने की समस्या
गेहूं की खरीद के लिए राज्य सरकार ने बारदाने का इंतजाम कर लिया है। यदि खरीद पंद्रह अप्रैल से शुरू हुई तो परेशानी आ सकती है। सरकार ने दो लाख बेल का ऑर्डर दिया है। एक बेल में पचास किलो क्षमता की पांच सौ बोरियां होती हैं। इसकेअलावा एफसीआई ने भी दो लाख बेल राज्य सरकार को एलोकेट कर दी है। बीस अप्रैल तक सारा बारदाना पहुंचने की उम्मीद है।
मंडियों में पहुंचेगी केंद्र की टीम हरियाणा की मंडियों में जाने को तैयार गेहूं की फसल को अब एक अप्रैल का इंतजार है। राज्य में एक अप्रैल से मंडियाें में गेहूं की आवक शुरू हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मंडियों में गेहूं खरीद के व्यापक इंतजाम कर लिए गए हैं। यदि बारिश होती है तो अधिकारियों के लिए गेहूं को कवर करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
उधर, गेहूं खरीद के लिए व्यवस्था का जायजा लेने केंद्र सरकार की एक टीम इस सप्ताह हरियाणा का दौरा करेगी। यदि कोई समस्या होगी तो उसका समाधान किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में पिछले वर्ष तक 375 मंडिया थीं। इस वर्ष मंडियों की संख्या कुछ बढ़ेगी। अब तक जो गेहूं एफसीआई खरीदता था, वह स्टेट की एजेंसियां खरीदेंगी।
हैफेड और कांफेंड सहित कुल पंाच ऐजेंसियां ऐसी हैं, जो हरियाणा में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू का देंगी। जहां एफसीआई की ओर से खरीद न किए जाने का सवाल है, भंडारण के लिए हरियाणा में एफसीआई ने अपने गोदाम दे दिए हैं।
सरकार का दावा है कि गेहूं खरीद की पर्याप्त व्यवस्था है। गेहूं भंडारण का इंतजाम कर लिया गया है। दस से 12 प्रतिशत गेहूं प्रति वर्ष एफसीआई के माध्यम से खरीदा जाता था। जबकि बाकी 88 प्रतिशत गेहूं प्रदेश सरकार की ऐजेंसियां खरीदती थीं।
इस बार पूरा गेहूं प्रदेश सरकार की एजेंसियां ही खरीदेंगी। पिछले वर्ष मंडियों में करीब 65 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी। चूंकि इस बार गेहूं की फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है, इसलिए मंडियों तक पहुंचने वाले गेहूं की मात्रा में कमी भी संभव है।
केंद्र से आया पत्र हरियाणा सरकार के पास केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव की ओर से पत्र आया है। इसमें कहा गया है कि एफसीआई गेहूं की सीधी खरीद नहीं करेगी, लेकिन उठान से लेकर भंडारण तक के मामले में ऐजेंसी पूरा ध्यान रखेगी।
गेहूं कम पहुंचा तो पड़ोसी राज्यों को होगी आसानी हरियाणा की मंडियों में आम तौर पर गेहूं पर्याप्त मात्रा में पहुंच जाता है। यदि इस बार आवक कुछ कम हुई तो उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती किसान इधर का रुख कर सकते हैं। हालांकि अब तक हरियाणा सरकार बार्डर पर ऐसे गेहूं को रोक देती थी, लेकिन इस बार देखना होगा कि सरकार क्या रुख अपनाएगी।
एफसीआई खरीद के लिए राजी इस बार फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शुरुआत में गेहूं खरीद को राजी नहीं थी, लेकिन सांझी मीटिंग में फूड सप्लाई विभाग ने कहा कि एफसीआई का स्टाफ तो यहां है ही, उसका उपयोग किया जाना चाहिए। राज्य सरकार सिर्फ 80 प्रतिशत फसल की खरीद करेगी। एफसीआई ने बीस प्रतिशत फसल खरीदने पर रजामंदी जता दी है।
केंद्र की टीम शीघ्र ही हरियाणा का दौरा करेगी। हमने मंडियों में खरीद के इंतजाम पूरे कर लिए हैं। हरियाणा में गेहूं खरीद में कोई दिक्कत नहीं आएगी। -एसएस प्रसाद, प्रधान सचिव, खादय एवं आपूर्ति विभाग