चंडीगढ़। खराब जीवनशैली, तनाव और मोबाइल के ज्यादा उपयोग से दिमाग के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इम्युनिटी कमजोर होने से दिमाग संबंधी ज्यादा समस्याएं आ रही हैं। इससे ब्रेन ट्यूमर जैसे रोग पनपने लगते हैं। सिरदर्द को हल्के में मत लीजिए। ब्रेन ट्यूमर वाले लगभग आधे लोगों में सिरदर्द होता है। सिरदर्द तब हो सकता है, जब एक बढ़ता हुआ ब्रेन ट्यूमर उसके आसपास स्वस्थ कोशिकाओं पर दबाव डालता है। इसके अलावा उल्टी आना, आंखों से एक की जगह दो-दाे दिखना और हार्मोन संबंधी लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पीजीआई के रेडियोथैरेपी और ओंकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश कपूर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पीजीआई में रोजाना ब्रेन ट्यूमर के मरीजों का इलाज होता हैं। राहत की बात यह है कि पीजीआई में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के लिए गामा नाइफ रेडियो सर्जरी तकनीक की सुविधा है। रोजाना 3-4 और सालभर में 700-800 मरीजों का गामा नाइफ से इलाज होता है। उन्होंने बताया कि गामा नाइफ रेडियो सर्जरी प्रक्रिया है। यह 3-4 घंटे का ट्रीटमेंट है। इसका प्रयोग 4 सेंटीमीटर तक के ट्यूमर के लिए किया जा रहा है। बड़े साइज के ट्यूमर में गामा नाइफ का प्रयोग नहीं किया जाता। इसका उपयोग ज्यादातर नसों में मौजूद छोटे ट्यूमर खासकर ब्रेन ट्यूमर के लिए किया जाता है। इसमें ट्यूमर पर रेडिएशन दिया जाता है, जो कैंसर सेल के अंदर मौजूद डीएनए को नष्ट कर देता है। इस मशीन दिमाग के अंदरूनी हिस्से में छुपे कैंसर कारक ट्यूमर को खोजकर खत्म कर देता है। इसके अलावा पीजीआई में हाई एनर्जी लीनियर एक्सेलेटर में इमेजेज गाइडेड रेडियोथेरेपी, वॉल्यूमेट्री कार्ड रेडियोथैरेपी और गामा नाइफ की तरह स्टीरियोटैक्टिक रेडिएशन थेरेपी एसआरटी की सुविधा भी है। एसआरटी से बड़े साइज के मल्टीपल ट्यूमर का ट्रीटमेंट किया जा सकता है।
एट्रियोवेन्ट्रिकुलर मालफॉर्मेशन ट्यूमर में गामा का ज्यादा प्रयोग
डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि बदलती जीवनशैली और मोबाइल के ज्यादा प्रयोग इम्युनिटी कमजोर कर रहा है। इस वजह से ब्रेन ट्यूमर के लोग शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि गामा नाइफ का प्रयोग सबसे कॉमन एट्रियोवेन्ट्रिकुलर मालफॉर्मेशन ट्यूमर में प्रयोग होता है। इसके अलावा शानोमा, मेनिनजोमा समेत कई तरह के ट्यूमर में गामा नाइफ रेडियोथेरेपी का प्रयोग होता है।