फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा में अब कौन सुनेगा दुखड़ा, पिछड़ा वर्ग आयोग का कामकाज ठप, न चेयरमैन न ही सदस्य

Thu, 30 Jan 2020 10:39 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन
हरियाणा में पिछड़ों की समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए सरकार का ध्यान उस ओर दिलवाने व पिछड़ों से जुड़े विवादों का निपटान करने के मकसद से गठित हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का कामकाज महीनों से ठप पड़ा है। आयोग का कार्यकाल 30 जून 2019 को पूरा हो चुका है। मगर उसके बाद सरकार ने अभी तक आयोग का पुनर्गठन ही नहीं किया है। न तो अब आयोग में चेयरमैन हैं और न ही सदस्य। लिहाजा हरियाणा के पिछड़े वर्ग के लोगों को फिलहाल इस आयोग का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस संदर्भ में जवाब मांगा है। विगत दिवस राष्ट्रीय आयोग ने चंडीगढ़ में समीक्षा बैठक के दौरान हरियाणा सरकार से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की कार्यप्रणाली की जानकारी मांगी थी। राष्ट्रीय आयोग ने यह पूछा था कि क्या राज्य पिछड़े वर्ग आयोग ने पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया। इसके जवाब में राष्ट्रीय आयोग को बताया गया कि आज तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने किसी भी प्रकार की क्षेत्रीय व राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन नहीं किया है।

राष्ट्रीय आयोग को यह भी  बताया गया कि हरियाणा सरकार ने 09 मई 2016 को हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था। जिसका कार्यकाल 30 जून 2019 को पूरा हो चुका है। उसके बाद आयोग का पुनर्गठन नहीं हुआ है। इसके पुनर्गठन का मामला हरियाणा सरकार के पास ही विचाराधीन पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यमुनानगर के डीसी को आयोग के सदस्य सचिव का अतिरिक्त जिम्मेदारी

पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में महज अधिसूचना के आधार पर ही इस आयोग का गठन किया गया था। मगर पहली मनोहर सरकार के कार्यकाल में इस संदर्भ में बकायदा एक्ट बनाया गया, जिसे हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम का नाम दिया गया। इसी एक्ट की धारा 3 की उपधारा 1 व 2 के अंतर्गत हरियाणा के राज्यपाल ने प्रदेश में इस आयोग का गठन किया।

यानी आयोग का गठन तो मजबूती और पूरी शक्तियों के साथ किया गया। रिटायर्ड जस्टिस एसएन अग्रवाल (चंडीगढ़) को आयोग का चेयनमैन बनाया गया। जबकि अशोक कुमार (हिसार), रितम्भरा सांघी (पंचकूला) व रमेश चंद (अंबाला) को सदस्य नियुक्त किया गया। सभी का कार्यकाल सात महीने पूर्व ही संपन्न हो चुका है। यानी अब आयोग में पिछड़ों की सुनने वाला कोई नहीं है।

मौजूदा हालात यह है कि सरकार ने औपचारिकतावश एक आईएएस अफसर मुकुल कुमार, जोकि यमुनानगर के डीसी हैं, उन्हें आयोग के सदस्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। जबकि चेयरमैन व अन्य सदस्यों के सभी पद अभी तक  रिक्त पड़े हैं। इसी वजह से आयोग में कई मामले पेंडिंग पड़े हैं, जिसमें जाट आरक्षण का मामला भी शामिल है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें