हरियाणा के पिछड़ा वर्ग-ए के लिए खुशखबरी है। सितंबर में प्रस्तावित पंचायत चुनावों में उन्हें आरक्षण मिलेगा। पचायतों की आबादी के हिसाब से बीसी-ए के लिए वार्ड आरक्षित होंगे। पूरे प्रदेश में एक समान आरक्षण लागू नहीं होगा, चूंकि पंचायतों में इस वर्ग की आबादी अलग-अलग है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को चंडीगढ़ में यह जानकारी दी।
सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। आयोग की सिफारिशें मिलने पर तुरंत चुनाव आयोग को अमल के लिए भेजी जाएंगी। 30 सितंबर से पहले पंचायत चुनाव कराने के लिए आयोग को पहले ही पत्र लिखा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीसी-ए को आठ प्रतिशत आरक्षण दिया था, जिसे वर्ग ने नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग जल्दी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। रिपोर्ट लागू करने के बाद चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी। बीसी-ए को आरक्षण के अलावा राज्य चुनाव आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोग ने दो दिन पहले सरकार को पत्र लिखकर बीसी-ए के आरक्षण को लेकर स्थिति साफ करने को भी कहा था।
आयोग ने राजनीतिक दलों से लिए सुझाव
आयोग के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायाधीश दर्शन सिंह ने गुरुवार को यहां हरियाणा निवास में विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों से पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के लिए सुझाव लिए। सभी दलों ने भारतीय संविधान के प्रावधान के अनुसार इस वर्ग के लोगों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की।
चेयरमैन ने कहा कि सरकार ने पिछड़ा वर्ग को शैक्षणिक क्षेत्र में आरक्षण देने का प्रावधान किया है। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। अब तक फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, हिसार, करनाल व अंबाला मंडल में लोगों से सुझाव लिए हैं। बैठक में भाजपा ओबीसी मोर्चा के राज्य उपप्रधान रमेश पाल, नरेश सैनी, ओबीसी मोर्चा के जसबीर सिंह बंजारा, कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के जिला प्रधान राजकुमार सैनी, सदस्य रंजीत सिंह, इंद्रजीत सिंह, इनेलो से नरेंद्र सिंधेर, बीएसपी से एडवोकेट गुरमुख सिंह ने विस्तार से अपने सुझाव रखे।