हरियाणा में अलग एसजीपीसी के गठन के लिए कुरुक्षेत्र से चौदह साल पहले शुरू हुए सिखों के संघर्ष को आखिरकार कैथल में मुक्कमल अंजाम मिला।
गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में आयोजित सम्मेलन में प्रदेश मुख्यमंत्री ने एचएसजीपीसी के गठन का ऐलान किया। गौरतलब है कि इस मांग के लिए वर्ष 2000 में कुरुक्षेत्र से हरबंस सिंह डाचर की अगुवाई एवं जगदीश सिंह झींडा की अध्यक्षता में एडहॉक कमेटी का गठन हुआ था।
साल 2000 में बनी एडहॉक कमेटी
पहली बार वर्ष 2000 में कुरुक्षेत्र में अलग कमेटी की मांग को लेकर एचएसजीपीसी का गठन हुआ, जिसकी अध्यक्षता हरबंस सिंह डाचर ने की थी। इस बैठक में जगदीश सिंह झींडा को एचएसजीपीसी का अध्यक्ष, दीदार सिंह नलवी को महासचिव तथा कंवजीत सिंह अजराणा को युवा प्रदेश अध्यक्ष चुना गया था।
एक बार तो इस संबंध में प्रदेश का सिख भी एकजुट हो गया था। वर्ष 2004 के शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में पहली बार इससे अलग होकर एडहॉक कमेटी के बैनर तले चुनाव लड़ा गया, जिसमें हरियाणा की 11 में 7 सीटों पर एचएसजीपीसी (एडहॉक) ने कब्जा किया। इसके बाद पूरे प्रदेश की सिख संगत अलग कमेटी के हक में खड़ी हो गई थी।
चुनावी घोषणापत्र में किया था कांग्रेस ने वादा
कांग्रेस ने भी वर्ष 2005 में सुरजेवाला के नेतृत्व में चुनाव घोषणा पत्र कमेटी ने अलग कमेटी बनाए जाने का वादा घोषणा पत्र में शामिल किया। इसके बावजूद अलग कमेटी का गठन नहीं हुआ।
इसके बाद अलग कमेटी के गठन में जैसे-जैसे देर होती गई। कांग्रेस एमएलए निर्मल सिंह इस संबंध में 17 मार्च 2007 को विधानसभा में गैर सरकारी प्रस्ताव लेकर आए। इसके अलावा कांग्रेस सरकार ने वर्तमान वित्तमंत्री चट्ठा के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया, जिसके लिए हरियाणा के 3 लाख से ज्यादा सिखों ने शपथ पत्र देकर अलग कमेटी के गठन की मांग की।
कांग्रेस ने वर्ष 2010 के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया
साथ ही अलग कमेटी के लिए संघर्षरत लोगों में झींडा व नलवी ग्रुप द्वारा अलग
होने के कारण एसजीपीसी के चुनाव में वर्ष 2009 में एचएसजीपीसी (एडहॉक) को
एक भी सीट नहीं मिली। वर्ष 2011 में भी कंवलजीत सिंह अजराणा ने भी इसे छोड़
दिया। इस कारण यह लगने लगा था कि शायद अब यह मुद्दा इतिहास बन जाएगा।
केंद्र में कांग्रेस सरकार ने भी इस संबंध में कोई रुचि नहीं ली और मामला
लटका रहा। लेकिन हरियाणा में कांग्रेस ने वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में
एचएसजीपीसी बनाए जाने को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया। फिर से
प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई। हालांकि कमेटी का गठन नहीं हुआ। इसके बाद भी
झींडा व नलवी ग्रुप ने हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा।
मई में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर धरना दिया
मई में लोकसभा चुनाव से पूर्व एचएसजीपीसी ने कांग्रेस द्वारा दो चुनावों में घोषणापत्र में इस मुद्दे को शामिल करने के बाद सिख संगत ने अलग कमेटी न बनाए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के आवास पर धरना शुरू किया। यहां आमरण अनशन शुरू किए जाने के कारण कांग्रेसी नेताओं ने आखिरकार यह आवाज सुननी पड़ी।
संघर्ष लाया रंग : झींडा
एचएसजीपीसी (एडहॉक) के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि काफी लंबा संघर्ष रहा। उन्होंने कुरुक्षेत्र में 6वीं पातशाही की सेवा अपने हाथों में लेने का प्रयास किया था, जिस पर उन्हें अकाल तख्त द्वारा तन्खैया घोषित किया था। उन्होंने पांच तख्तों की सेवा की थी। इसके अलावा रेल रोको, जीटी रोड पर जाम सहित प्रदेश भर में सभाओं का सिलसिला जारी रहा। आज उनका संघर्ष कामयाब हो गया है। इसके लिए सभी सिखों को बधाई।