-सीईओ के साथ बैठक में भी नहीं बनी बात, कोर कमेटी के बाद आगे की रणनीति की घोषणा करेगी एसोसिएशन
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए भुगतान न होने के चलते निजी अस्पतालों व पंजाब सरकार के बीच चल रहा गतिरोध जारी है। इस कारण पिछले तीन दिनों से आयुष्मान योजना के तहत लोगों का निजी अस्पतालों में इलाज नहीं हो पा रहा है। साथ ही पूर्व निर्धारित ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहे हैं, जिस कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को अलग-अलग जिलों में इलाज के लिए मरीज अस्पतालों में पहुंचे, लेकिन उन्हें निराश होकर वापिस लौटना पड़ा। निजी अस्पतालों का आरोप है कि उनको 600 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की गई है, जिसके चलते उनको मजबूरी में योजना के तहत इलाज बंद करना पड़ रहा है, जबकि पंजाब सरकार का दावा है कि निजी अस्पतालों का सिर्फ 197 करोड़ रुपये ही बकाया बाकी है।
इस संबंध में प्राइवेट अस्पताल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन के राज्य सचिव दिव्यांशु गुप्ता ने कहा कि उनकी शुक्रवार को स्टेट हेल्थ एजेंसी की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बबिता के साथ बैठक हुई थी। बैठक में उन्होंने 600 करोड़ रुपये की बकाया राशि से संबंधित उनको अपना रिकार्ड दिखाया, लेकिन विभाग ने उनके साथ कोई रिकार्ड साझा नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बकाया राशि जारी नहीं की जाएगी, वह अपना संघर्ष जारी रखेंगे। साथ ही जल्द ही अपनी कोर कमेटी की बैठक बुलाएंगे, जिसके बाद ही आगे की रणनीति की घोषणा करेंगे। वहीं स्टेट हेल्थ एजेंसी की सीईओ बबिता ने बताया कि अप्रैल से लेकर अब तक 214 करोड़ रुपये वह अस्पतालों को जारी कर चुके हैं और जल्द ही 50 करोड़ रुपये की और राशि जारी करने की तैयारी कर रहे हैं।
केंद्र सरकार रोक रखे राज्य के 8000 करोड़: कंग
आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने आयुष्मान योजना को लेकर भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के बयान पर पलटवार किया है। कंग ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य के 8000 करोड़ रुपये रोक रखे हैं, जिन्हें शीघ्र जारी किया जाना चाहिए। शनिवार को पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान कंग ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल बकाया राशि 376 करोड़ रुपये में से 220 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का बकाया है। साथ ही केंद्र ने पंजाब के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 950 करोड़ रुपये फंड भी रोक रखा है। इसी तरह ग्रामीण विकास फंड और मंडी विकास फंड भी जारी नहीं किया जा रहा है। आरडीएफ के 6,800 करोड़ और एमडीएफ के 177 करोड़ केंद्र सरकार पर बकाया है। उन्होंने कहा कि व्यापक विरोध के कारण मोदी सरकार को किसान विरोधी बिल वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन अब वह पंजाब की व्यवस्थित मंडी प्रणाली को कमजोर कर रही है। कंग ने कहा कि केंद्र ने पीएसपीसीएल की कर्ज सीमा 50% कम कर दी है, जिसका असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लगातार पंजाब और पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ काम किया है।