अयोध्या में राम मंदिर जरूर बनेगा। वे पहले शांति से अपनी बात रख रहे हैं, यदि सरकार नहीं जागती तो क्रांति का रास्ता अपनाया जाएगा। यह कहना है अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य रमेश मिश्र का।
वे यहां अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रदेश में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत करने रविवार को रोहतक में पहुंचे थे। सुखपुरा चौक पर छोटूराम नगर से हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। महासभा ने एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
अध्यादेश लाना चाहिए और मंदिर बनाना चाहिए
आचार्य मिश्र ने कहा कि वर्तमान में भाजपा सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। वह मंदिर निर्माण के लिए विधेयक पास कर सकती है। केंद्र की मोदी सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए और अयोध्या में राम मंदिर बनवाना चाहिए। अयोध्या की आम जनता भी चाहती है कि मंदिर बने।
दावा किया कि इसमें मुस्लिम समुदाय की भी सहमति है। लेकिन मंदिर निर्माण में सबसे अधिक समस्या लालू प्रसाद, मुलायम सिंह यादव व मायावती जैसे नेताओं को होती है। भगवान राम का मंदिर तिरपाल में है और उसके फटने पर उसे बदलने के लिए कोर्ट की अनुमति ली जाती है।
अमेरिका नहीं रूस से दोस्ती बढ़ाओ
सरकार को अमेरिका परस्त नीति बदलनी चाहिए। अमेरिका ,चीन और पाकिस्तान कभी भी भारत के मित्र नहीं हो सकते। रूस भारत का स्वाभाविक मित्र है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करना गलत है। अमेरिका की एक संस्था ने अभी पिछले दिनों ही आरएसएस को आतंकवादी संगठन की सूची में रखा है।
पीके से हिंदू भावनाओं को ठेस
आचार्य मिश्र ने कहा कि आमिर खान की फिल्म पीके ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। हिंदू महासभा बहू लाओ बेटी बचाओ अभियान से महिलाओं को सम्मान दिलाना चाहती है।
इस अवसर पर योगेश शर्मा, मदन गुर्जर, प्रेम सिंह रापडिया, डॉ. सत्यनारायण वशिष्ठ, जगदीप दत्त, सुमेर सिंह, प्रवेश वशिष्ठ, हीरा लाल, रविंद्र आर्य, सुनील कु मार मलिक, जगबीर सिंह, रवि कुमार, सुरेश वर्मा, सुरजीत नैन, यशदेव और विकास वशिष्ठ मौजूद रहे।
गांधी की नहीं गोडसे की हुई हत्या
आचार्य रमेश मिश्र ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता नहीं हैं। हत्या महात्मा गांधी की नहीं, नत्थू राम गोडसे की हुई है। भारत का संविधान 1950 में लागू हुआ था, इससे पूर्व ही महात्मा गांधी की मृत्यु हो चुकी थी। उस समय भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र नहीं था।
नत्थू राम गोडसे के साथ तत्कालीन सरकार ने अन्याय किया। फांसी की सजा घोषित होने के 15 दिनों के अंदर ही गोडसे को फांसी दे दी गई थी, सफाई देने का मौका ही नहीं दिया गया। गोडसे के जीवन की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने नत्थू राम गोडसे पर बनाई जा रही फिल्म का विरोध करने वालों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि गोडसे के साथ अन्याय को अब सहन नहीं किया जाएगा।