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Ram Mandir Bhumi Pujan: पिता ने तालाबंदी में रखा था, फिर भी छत से कूदकर गए थे अयोध्या

Wed, 05 Aug 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल गगन तलवार, करनाल

सार

  • राम मंदिर के संघर्ष पर विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री से खास बातचीत
  • गोली लगने से मौत की खबर घर आई, लेकिन खुद चलकर आ पहुंचे घर
  • यूपी पुलिस का जय श्री राम का कोड भी नहीं चला संघ की बाल शाखा पर
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चंद्रवीर भाटिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिता ने ताला लगाकर बंद कर रखा था, फिर भी 16 साल के चंद्रवीर भाटिया छत से कूद कर राम मंदिर बनवाने के लिए अयोध्या पहुंच गए थे। हुआ यूं कि गोली लगने से बेटे की मौत की गलत सूचना पर घर में मातम छा गया। सब विलाप करने लगे। बुजुर्ग पिता ने हिम्मत जुटाई और शव लेने घर से निकले ही थे कि जिसका शव लेने जा रहे हैं वह खुद चलकर आ रहा है।
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महज 16 साल की उम्र में रामलला के दर्शनों को पिता की तालाबंदी को भेदकर आरएसएस की बाल शाखा के मुख्य शिक्षक चंद्रवीर भाटिया अयोध्या पहुंच गए थे। 1990 में यूपी सरकार के आदेश पर पुलिस भी मंदिर के लिए पहुंचने वालों को पकड़ रही थी। लेकिन करनाल के इस नन्हें योद्धा के आगे पुलिस का जय श्री राम कोड भी नहीं चला।

मंदिर पहुंचकर भगवान राम के दर्शन किए और मंदिर के लिए संघर्ष भी किया। आज राममंदिर की नींव के शुभ अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री चंद्रवीर भाटिया ने उन दिनों के संघर्ष की कहानी को अमर उजाला के साथ सांझा किया। पढ़िए उन्हीं की जुबानी...
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...तो 65 में से 62 लोग हो गए थे गिरफ्तार

1990 में यूपी में मुलायम सिंह सीएम थे। 1992 में जब मंदिर का पुराना विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) टूटी थी उस समय भी मैं अयोध्या में था। 30 अक्तूबर 1990 का दिन राम मंदिर के लिए कार सेवा करने का दिन तय था। लाल कृष्ण अडवानी उस समय देश में रथ यात्रा निकाल रहे थे। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल भी देशभर में हिंदू सम्मेलन कर रहे थे।

30 अक्तूबर का दिन उसी मेहनत का परिणाम था। जिसे सरकार ने रोकने का प्रयास किया। हर रामभक्त को गिरफ्तार किया जा रहा था। मैं तब करनाल में संघ से जुड़ा था, वहीं से मंदिर के लिए निकलने का जोश उमड़ा। पिता चिंतित थे, तो उन्होंने घर पर ताला लगाकर मुझे बंद कर दिया। घर से भागकर दिल्ली पहुंचा। यहां पश्चिम विहार क्षेत्र से 65 लोग अयोध्या निकले।

लखनऊ तक ट्रेन से पहुंच गए। यहां पुलिस ने उतार लिया। यहां से बस में बैठकर बाराबंकी पहुंचे। रास्ते में तीन-चार बिना वर्दी वाले पुलिसकर्मी बस में चढ़े। उन्होंने जय श्री राम का नारा लगा दिया। जिन लोगों ने जय श्री राम में जवाब दे दिया। उनको गिरफ्तार किया गया। इस तरीके से हमारे ग्रुप के 65 में से 62 लोग गिरफ्तार हो चुके थे। ....जैसा चंद्रवीर भाटिया ने बताया।
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हाजिरी नहीं लगी, इसलिए शहीद मान घर संदेशा भेजा

चंद्रवीर के अनुसार 30 अक्तूबर को वे अयोध्या पहुंच गए थे। सभी तुलसी स्मारक में रुके थे। जहां उनकी रोजाना हाजिरी लगती थी ताकि पता चले कोई भागा या पुलिस के हत्थे तो नहीं चढ़ा। जैसे ही राम लला के जन्म स्थान के नजदीक पहुंचे। हेलीकॉप्टर आसमान में उड़ा। अफवाह फैल गई कि सीएम निरीक्षण कर रहे हैं। अब कुछ होने वाला है। जबकि हेलीकॉप्टर में सीएम नहीं थे। हेलीकाप्टर के जाते ही गोलियां चलने लगी। जिसमें कोठाहरी बंधु दो भाई भी शहीद हो गए।

काफी लोगों को गोलियां लगी। लाठीचार्ज के साथ भगाना शुरू किया। हमारे ऊपर आंसू गैस के गोले और प्लास्टिक की गोलियां लगीं। मेरी इतनी पिटाई हुई कि बेहोश हो गया। वहां से संत उठाकर आश्रम ले गए। 16 घंटे बाद जब होश आया तो इसी आश्रम से दो नवंबर को दोबारा आंदोलन शुरू कर दिया। इतने मेंतुलसी स्मारक से उनके घर पर उनकी मौत होने का संदेशा भेज दिया। चार नवंबर को वे घर वापस पहुंचे थे।

कर्णनगरी के धर्मस्थलों की मिट्टी और जल भी अयोध्या भेजा
चंद्रवीर ने बताया कि स्वामी ज्ञानानंद करनाल से अयोध्या मंदिर की नींव के सुअवसर पर गए हैं। करनाल जिले के ऐतिहासिक धर्म स्थलों की मिट्टी और जल वे साथ लेकर गए हैं। आज शहर को परिषद की ओर से सजाया गया है। चंद्रवीर संघ परिवार से हैं। उनके पिता वैद्य नानक चंद भाटिया संघ में थे। पिता के साथ
वे बाल शाखा में जाते थे। वर्तमान में उनके पास विश्व हिंदू परिषद के कुरुक्षेत्र विभाग के मंत्री का दायित्व है। इस विभाग में कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत और कैथल जिले उनके कार्यक्षेत्र में हैं।
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