स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने शनिवार को जिला अदालत में दो दिवसीय ‘अवेयरनेस, रेफरल कोचिंग एंड मॉनीटरिंग प्रोग्राम’ शुरू हुआ।
इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल व अथॉरिटी के मुख्य संरक्षक और अथॉरिटी के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस हेमंत गुप्ता की देखरेख में किया गया।
कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट की मीडिएशन एंड काउंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी के अंतर्गत आयोजित किया गया है। शनिवार को मीडिएशन सेंटर में रेफर किए गए 8 केसों का मौके पर निपटारा किया गया।
वहीं, मीडिएशन के फायदों व जागरूकता को लेकर बार रूम में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 200 वकीलों, लॉ स्टूडेंट्स मीडिएर्ट्स और लीगल एंड काउंसिल ने भाग लिया।
इस दौरान स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के सदस्य सचिव न्यायाधीश लालचंद ने प्रतिभागियों को बताया कि चंडीगढ़ जिला अदालत में मीडिएशन सेंटर के जरिए लोगों के विवादों के निपटाने में कामयाबी मिली है।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस के वुमन सेल के रेफर किए जा रहे मेट्रिमोनियल केसों को भी मिडिएर्ट्स द्वारा प्री-लिटीगेटिव स्टेज पर सुलझाया जा रहा है।
ऐसे में दोनों पक्षों के समय और पैसे की बचत के साथ-साथ उनके रिश्ते टूटने से बच रहे हैं। दिल्ली मीडिएशन सेंटर से आई ज्यूडीशियल अफसर शालिंद्र कौर ने इसके लाभ के बारे में बताया।
उन्होंने वकीलों की सहभागिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके बिना मीडिएशन की कामयाबी अधूरी है।
इसी तरह दिल्ली मीडिएशन सेंटर से ही आए ट्रेनर वकील सुरिंद्र सिंह ने बताया कि मीडिएशन में पहुंचकर दोनों पक्षों के समय व पैसे की बचत होती है और सालों तक अदालतों में चलने वाले लंबे विवादों से भी छुटकारा मिलता है।
जिला बार एसोसिएशन के सचिव बलजीत सिंह सैणी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन दो सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मीडिएशन सेंटर में काम करने वाले ट्रेंड मीडिएर्ट्स व ज्यूडीशियल अफसर भाग लेंगे। दिल्ली से आए मीडिएटर ट्रेनर्स जानकारी मुहैया करवाएंगे।