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जागरूकता: पीजीआई में पांच महीने के भीतर 12 आर्गन डोनेशन

Sun, 29 May 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़
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आर्गन डोनेशन की जंग में पीजीआई को जबरदस्त कामयाबी हासिल हुई है। पांच महीने के भीतर 12 ब्रेन डेड पेशेंट के आर्गन डोनेशन में सफलता मिली है। यदि पिछले साल की बात करें तो मई महीने तक सिर्फपांच आर्गन डोनेशन हुए थे। इसमें कोई शक नहीं कि पीजीआई ने आर्गन डोनेशन के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
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पिछले एक साल से स्कूल कालेज और संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर और नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल का भी अहम योगदान रहा है। ब्रेन डेड पेशेंट घोषित होने के बाद पीड़ित के परिजनों को आर्गन डोनेशन के लिए तैयार करने का काम ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर का होता है, जो काफी मुश्किल काम होता है।

विमला देवी दे गईं चार को नया जीवन
होशियारपुर के रहने वाली विमला देवी मरते-मरते चार लोगों को जीवन दे गईं। वे अपने घर पर गिर गईं थीं। उन्हें काफी गंभीर चोटें आईं थीं। उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। जब वे पीजीआई आईं तो उन्हें ब्रेन हेमरेज था। काफी कोशिशों के बावजूद डाक्टर उनकी रिकवरी करने में असफल रहे। ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर राजेंद्र कौर ने इस बारे में विमला देवी के बेटे धमेंद्र सोढी से बात की। धमेंद्र अपनी मां के आर्गन देने के लिए राजी हो गए। धमेंद्र पहले से ही आर्गन डोनेशन के लिए जागरूक थे। इसलिए ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर को ज्यादा दिक्कते नहीं आई।
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दो किडनी और दो कोर्निया दीं
रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने बताया कि पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उनकी दो किडनी जरूरतमंद मरीज को दी गई। इससे दोनों मरीजों को नई जिंदगी मिली। विमला देवी की दोनों कोर्निया भी जरूरतमंद पेशेंट के काम आ गईं हैं। नोडल आफिसर डा. विपिन कौशल ने कहा कि अभी भी लोगों में जागरूकता की जरूरत है। जागरूकता के लिए सिविल सोसाइटी, धार्मिक नेताओं और अन्य लोगों को जागरूकता फैलानी होगी।
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