पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से बारहवीं पास विद्यार्थियों को वीजा न देने के ऑस्ट्रेलिया सरकार के फैसले पर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने रविवार को अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। इसमें मामले को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाने का फैसला किया गया है।
अमर उजाला ने दस अप्रैल के संस्करण में प्रकाशित खबर के जरिए यह मुद्दा उठाया था कि ऑस्ट्रेलिया में पंजाब बोर्ड के विद्यार्थियों को वीजा नहीं दिया जा रहा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के चलते पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थी अंक तो ज्यादा ले लेते हैं पर आइलेट्स में पांच बैंड भी हासिल नहीं कर पाते।
रविवार को शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। डॉ. चीमा ने बताया कि इस मुद्दे पर मानव संसाधन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को विस्तृत अधिकारिक पत्र भेजा गया है। उनसे मांग की गई है कि यह मामला ऑस्ट्रेलिया उच्चायोग से उठाएं क्योंकि यह विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है।
डॉ. चीमा ने कहा कि पंजाब बोर्ड देश के सर्वश्रेष्ठ बोर्ड में शुमार है। अब तक यहां से पास हुए हजारों विद्यार्थियों विभिन्न देशों में पढ़ रहे हैं। अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन कर बोर्ड का नाम रोशन कर रहे हैं। बोर्ड नेशनल करिकलम फ्रेमवर्क का सख्ती से पालन करता है। मामले को उच्चतम स्तर पर उठाया जा रहा है ताकि बोर्ड की गरिमा को ठेस न पहुंचे। बैठक में बोर्ड चेयरपर्सन डॉ. तजिंदर कौर धालीवाल, डीजीएसई प्रदीप अग्रवाल, डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह और डायरेक्टर एकेडेमिक्स मनजीत कौर भी मौजूद थीं।
‘पहली बार हुआ है ऐसा’
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभी तक किसी भी देश से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई है। हालांकि वीजा नामंजूर करने के कई कारण बताए गए हैं। इनमें विद्यार्थी की आर्थिक स्थिति और पढ़ाई के बाद उसका भारत लौटना शामिल हैं। डॉ.चीमा ने विद्यार्थियों से अपील की कि अगर किसी को भी वीजा में कोई समस्या आती है तो बोर्ड की चेयरपर्सन से संपर्क करें।