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Chandigarh News: मौसी का बेटा बताता था इंस्पेक्टर... हर कोई समझ रहा था मेजर

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस में एक फर्जी मेजर की कारगुजारी ने विभाग पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गणेश भट्ट खुद को सेना का मेजर बताते हुए वर्षों तक पुलिस महकमे में अपनी धाक जमाता रहा। इसका सबसे बड़ा कारण था पूर्व क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर का साथ। वह उसे अपनी मौसी का बेटा बताकर संरक्षण दे रहा था।
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फर्जी मेयर का मामला तब सामने आया जब पुलिस अधीक्षक जसबीर सिंह को गणेश भट्ट पर शक हुआ। इसके बाद खुफिया ब्यूरो (आईबी) से मिले इनपुट ने उनके शक को और गहरा कर दिया। एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया गया जिसमें पता चला कि गणेश भट्ट पहले भी 2021 और 2023 में सेना अधिकारी बनकर ठगी के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है।


इंस्पेक्टर की मदद से पुलिस पर धौंस
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले गणेश भट्ट का क्राइम ब्रांच के पूर्व इंस्पेक्टर के साथ गहरा संबंध था। इंस्पेक्टर ने न सिर्फ उसे अपना रिश्तेदार बताया बल्कि अपनी सरकारी गाड़ी, ड्राइवर और गनमैन भी उसके इस्तेमाल के लिए दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरे पुलिस विभाग में गणेश भट्ट की पहचान एक असली मेजर के रूप में बन गई। सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के पूछने पर भी इंस्पेक्टर उसे अपनी मौसी का बेटा बताकर हर बार बचा लेता था। गणेश किसी अधिकारी से संपर्क बनाने के लिए दूसरे अधिकारी से फोन करवाता था, जिसके बाद उसे मिलने जाता था। यही नहीं, आरोपी गणेश एक पूर्व डीजीपी को भी पुलिस मुख्यालय में मिलने जाता था।
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ठगी के बावजूद मिला संरक्षण

चौंकाने वाली बात यह है कि 6 जून 2025 को गणेश भट्ट के खिलाफ आईपीसी की धारा 318 और 319 (बीएनएस) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद भी इंस्पेक्टर ने उसका साथ नहीं छोड़ा। यह भी बताया जा रहा है कि जिस दिन आरोपी पकड़ा गया, उस दिन भी इंस्पेक्टर उसके साथ ही था। एक महिला सिपाही से हड़पे गए 5 लाख रुपये में से एक लाख रुपये इंस्पेक्टर के खाते में ट्रांसफर किए गए थे।



बड़े सवाल

इंस्पेक्टर ने आखिर क्यों अपनी सरकारी गाड़ी फर्जी मेजर को दे दी?

किस आधार पर गाड़ी के साथ ड्राइवर और गनमैन उपलब्ध कराए जाते रहे?

क्या अफसरों को भनक नहीं लगी कि कोई बाहरी व्यक्ति पुलिस संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है?

इतने लंबे समय तक फर्जी मेजर पुलिस में धौंस कैसे जमाता रहा?

जांच में क्या सिर्फ फर्जी मेजर जिम्मेदार होगा या इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई होगी?

6 जून को हुई थी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज
6 जून 2025 को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। गणेश चंडीगढ़ पुलिस के कई अधिकारियों को धोखा भी दे चुका है। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड में कई पुलिसकर्मी संपर्क में मिले थे। कई मुलाजिमों के बयान दर्ज किए गए, जिसमें महिला सिपाही के साथ पांच लाख के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।


पुलिस ने किया थर्ड डिग्री टॉर्चर, शरीर पर कई जगह चोट के निशान

गणेश ने आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। उसे हिरासत में पानी तक नहीं मिला। मेडिकल में शरीर पर चोट के निशान, आंख के ऊपर सूजन, कान से सुनने की क्षमता में कमी और हाथ-पैर में सूजन पाई गई। आरोपी ने पिटाई का आरोप जांच अधिकारी पर लगाया। अदालत ने एसएसपी चंडीगढ़ को निर्देश दिया है कि केस की जांच किसी अन्य पुलिस अधिकारी को सौंपी जाए।
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