नोटबंदी के 50 दिन बाद भी एटीएम खाली
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नोटबंदी के पचास दिन पूरे हो गए हैं। लेकिन अभी तक शहर के अधिकतर एटीएम में पैसे नहीं हैं। लोग घंटों एटीएम की तलाश कर पैसे निकालने के लिए मजबूर हैैं। जानकारी के मुताबिक आठ नवंबर को नोटबंदी का फैसला आया था। उसी दिन से लोगों की परेशानियां शुरू हो गई थी। आज तक भी इलाके के कई कई एटीएम पैसे नहीं हैं। जिसके चलते लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है।
इस परेशानी में आम आदमी से लेकर व्यापारी तक सब परेशान हैं। फेज-दो निवासी शालू सिंह ने बताया कि वह एक आईटी कंपनी में काम करती हैं। सैलरी पैकेज भी शानदार है। लेकिन एटीएम में पैसे न आने से काफी दिक्कत आ रही है। घर का छोटा सामान तो खुले पैसों से आता है। ऐसे में उनके लिए परेशानी आ गई है। इसी तरह फेज-3बी2 मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान जतिंदर पाल सिंह जेपी ने बताया कि नोटबंदी से मार्केट प्रभावित हुई। व्यापार 70 फीसदी तक गिर गया। जिस हिसाब से मार्केट में पहले ग्राहक आते थे। अब वैसी स्थिति नहीं रह गई है। मार्केट पूरी तरह से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीति पूरी तरह से साफ करनी चाहिए। ताकि लोगों को परेशानी से बचाया जा सके।
रियल एस्टेट मार्केट में छाई मंदी
नोटबंदी के बाद अभी एंड यूजर्स केंद्र सरकार की ओर से भविष्य में होने वाली ब्याज दरों में कटौती का इंतजार करने में लग गए हैं। जिसके चलते प्रापर्टी बाजार में फिलहाल मंदी का दौर है। फिलहाल यह ज्यादा समय तक नहीं रहने वाला। उन्होंने दावा किया है कि नोटबंदी से रियल एस्टेट का कारोबार करने वालों को अधिक लाभ होगा। कुछ समय के लिए धैर्य रखने की जरूरत है।
-विजय अरोड़ा, अध्यक्ष, बिल्डर एसोसिएशन, पीरमुछल्ला (जीरकपुर)।
गमाडा की स्कीम को फीका रिस्पांस
नोटबंदी के फैसले से गमाडा द्वारा निकाली गई रिहायशी सोसाइटियों की स्कीम को भी फीका रिस्पांस रहा है। इसके अलावा गमाडा ने कंपनियों के लिए फ्लैटों की स्कीम निकाली थी। उसके लिए भी अब गिनी चुनी कंपनियां पहुंच रही है।