गांव ईस्सापुर से निकल रहे बरसाती नाले में प्रदूषण की समस्या के खिलाफ गांव वासियों की ओर से केमिकल कंपनियों के खिलाफ लंबे समय से लडे़ जा रहे केस में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल दिल्ली की अदालत ने केस में प्रतिवादी कंपनी पंजाब केमिकल्स एंड क्रॉप्स प्रोटेक्टशन के मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। कंपनी पर आरोप है कि उनका कोई नुमाइंदा बीती 8 दिसंबर को एनजीटी में केस की सुनवाई दौरान हाजिर नहीं हुआ। इसकी एवज में 10 हजार रुपये का बॉण्ड भरकर कोर्ट में पेश किया जाए।
बता दें कि गांव वासियों के केस की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कंपनियों की ओर से छोड़े जाने वाले दूषित पानी की समस्या के हल के लिए ईटीपी स्थापित करने के आदेश दिए थे। लेकिन लंबे समय से यह प्लांट चालू नही हो सका है। बताया जा रहा है कि प्लांट पूरी तरह से बन कर तैयार हो गया है लेकिन बिजली का कनेक्शन न मिलने के कारण यह प्लांट चालू नहीं हो सका। हालांकि प्लांट चलने से पहले ही सुनवाई के दौरान उक्त कंपनी का कोई भी नुमाइंदा सुनवाई में नही पहुंचा। जिसके चलते अदालत ने कंपनी के एमडी के गैर जमानती वारंट जारी कर पेश होने के लिए कहा है।
इस प्लांट का निर्माण भी प्रदूषण के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी), नई दिल्ली में चल रहे केस की सुनवाई दौरान संभव हो पाया है।
डेराबस्सी में इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट की स्थापना के 25 साल बाद भी पीएसआईईसी यहां एंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) का बंदोबस्त नहीं कर पाई थी। जबकि यहां 87 फैक्ट्रियां हैं। अब पीएसआईईसी फोकल प्वाइंट में 2 एमएलडी क्षमता का ईटीपी लगा दिया है। इससे जहां उद्यमियों को सहूलियत मिलेगी, वहीं स्थानीय लोगों को प्रदूषण से भी राहत मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत ईटीपी का मकैनिकल और सिविल वर्क कब का पूरा हो चुका है।
पावरकॉम के एसडीओ महिंदरपाल के अनुसार ईटीपी के लिए विभाग की ओर से डिमांड नोटिस जारी किए हुए दो हफ्ते से अधिक समय हो चुका है। लेकिन इसका संचालन करने वाली कंपनी ने अब तक करीब चार लाख फीस जमा नहीं कराई है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंजीनियर एसएस मठारू के अनुसार दो चार दिन में फीस व अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ईटीपी नए वर्ष में चालू हो जाएगा।
इस संदर्भ में पीसीसीपीएल के डायरेक्टर(ऑप्रेशंस) अवतार सिंह ने कहा एनजीटी अदालत में जस्टिस बदलने से यह गफलत पैदा हुई है। उन्होंने बताया कि इस केस में उनकी सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने की वजह से कंपनी को सुनवाई दौरान पेशी से छूट मिली हुई है। नए जस्टिस को उक्त आश्य के पुराने जस्टिस के ऑर्डर दिखा दिए गए हैं। साथ ही इस संदर्भ में एनजीटी को 10 हजार रुपये का बॉण्ड भी सौंपा जा चुका है।