उड़नपरी पीटी ऊषा के अनुसार कोई खिलाड़ी एक दिन, एक सप्ताह या एक महीने अभ्यास कर उसैन बोल्ट नहीं बन सकता। उन जैसा खिलाड़ी बनने के लिए कई सालों तक लगातार मेहनत करनी पड़ती हैं।
उसके लिए ग्रास रूट लेवल से तैयारी करनी पड़ती है। वे वीरवार को सेक्टर-35 स्थित सन साइन मिडोज स्कूल के वार्षिक स्पोर्ट्स डे पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने चंडीगढ़ पहुंची थीं।
जब उनसे भारत के एथलेटिक्स में पिछड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि प्लानिंग करते हुए एक सिस्टम के साथ चलने से ही सफलता मिलती है।
विदेशी एथलीटों को यह सुविधा मिल रही हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में एथलीट नहीं उभर रहे हैं। लंदन ओलंपिक में भारत की एथलीट ग्यारहवें स्थान पर रही थी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि रियो ओलंपिक 2016 में भारत के एथलीट पदक जीतने में कामयाब होंगे। भारत में भी खिलाड़ी एथलेटिक्स में रुचि ले रहे हैं।
सिंथेटिक ट्रैकों का मिलेगा लाभ
ऊषा ने बताया कि देश में खेल सुविधाओं में इजाफा हुआ है। कई शहरों में सिंथेटिक ट्रैकों का निर्माण हो चुका है।
खिलाड़ियों को उन पर अभ्यास करना चाहिए। अगर एथलीटों को ओलंपिक में पदक जीतने हैं तो ग्रास रूट लेवल से खिलाड़ियों को तैयार करना होगा।
एथलेटिक्स एसोसिएशनों को विशेष तैयारियां कराते हुए खिलाड़ियों को दिमागी रूप से मजबूत बनाना चाहिए।
फिटनेस जरूरी
पीटी ऊषा ने कहा कि किसी भी गेम के लिए फिटनेस जरूरी हैं। बिना फिटनेस के मेडल नहीं जीते जा सकते।
तरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ द्वारा भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन की मान्यता रद्द करने के बारे में उन्होंने बताया कि यह विवाद जल्द ही खत्म हो जाएगा। भारतीय खिलाड़ी फिर से ओलंपिक का हिस्सा बन पाएंगे।