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हरियाणा: कालका से पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी की विधानसभा सदस्यता बहाल 

Thu, 20 May 2021 04:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सदस्य रद्द करने पर कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष पर हमलावर हो चुकी थी। प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने ट्वीट कर प्रदीप चौधरी की सदस्यता रद्द करने को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया था। 
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प्रदीप चौधरी। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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कानूनी राय लेने के बाद स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कांग्रेस के प्रदीप चौधरी की विधानसभा सदस्यता बहाल करने की घोषणा की है। अब कालका विधानसभा हलके में उपचुनाव नहीं होगा। प्रदीप चौधरी को नालागढ़ की निचली अदालत ने जो सजा सुनाई थी उस पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रोक लगाने के बाद यह निर्णय लिया है।

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स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने हाईकोर्ट के स्टे के बाद महाधिवक्ता बलदेव महाजन से कानूनी राय मांगी थी। चौधरी की सदस्यता बहाली जिला एवं सत्र न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ स्थित प्रथम श्रेणी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जितेंद्र कुमार की अदालत ने 28 जनवरी को लोगों को भड़काने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्रदीप चौधरी को दोषी ठहराते हुए 3 साल की कैद और आर्थिक दंड की सजा सुनाई थी। अदालत के फैसले के मद्देनजर चौधरी की सदस्यता समाप्त करने की घोषणा के बाद कालका सीट रिक्त घोषित कर भारतीय चुनाव आयोग को जानकारी दे दी थी। 


जिला सत्र न्यायालय के अंतिम निर्णय तक सदस्यता रद्द करने के फैसले पर रोक
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 19 अप्रैल को निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। चौधरी ने 26 अप्रैल 2021 को विधानसभा स्पीकर से मिलकर उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी एवं प्रतिवेदन देकर अपनी विधानसभा सदस्यता बहाल करने की प्रार्थना की थी। ज्ञान चंद गुप्ता ने इस फैसले के मद्देनजर प्रदीप चौधरी की विधानसभा सदस्यता से अयोग्यता और कालका निर्वाचन क्षेत्र को रिक्त करने की अधिसूचना 19 अप्रैल 2021 से जिला एवं सत्र न्यायालय के अंतिम निर्णय तक वापस ली है। चौधरी को सदस्यता रद्द रहने की अवधि का वेतन व भत्ते नहीं मिलेंगे।
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यह है नियम
लोक-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) में प्रावधान है कि किसी भी अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायक को यदि दो वर्ष से अधिक के कारावास की सजा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से आयोग्य माना जाता है। सजा पूरी किए जाने की तिथि से वह 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने लिली थॉमस बनाम भारत सरकार केस की सुनवाई करते वक्त भी इस प्रावधान को स्पष्ट किया है। केस के निर्णय अनुसार दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर विधानसभा सदस्य की सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाती है।

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