सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह से मांग की कि जलियांवाला वाला बाग से दो किलोमीटर दूर स्तिथ ‘क्रॉलिंग गली’ का नाम बदल कर ‘फ्रीडम स्ट्रीट’ या ‘शहीदां-दी-गली’ रखा जाए। जरनल डायर ने 150 मीटर लंबी इस गली को आजादी के दीवानों को रेंगकर पार करने की सजा सुनाई थी। एक शताब्दी बीतने के बावजूद गली का नाम नहीं बदला गया है।
यह गली उत्पीड़न का ऐतिहासिक अनुस्मारक है, जिसमें औपनिवेशिक शासकों ने भारतीयों को क्रॉल किया था। पंजाब सरकार के बार-बार प्रयासों के बाद भी केंद्र सरकार गहरी नींद से नहीं जागी है।
इस स्थान को इसका उचित महत्व नहीं दिया गया है। शहीद स्थली का विकास करने के लिए एक विस्तृत परियोजना तैयार की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी को इसके लिए एक प्रस्ताव भेज कर 100 करोड़ की मांग की गई थी। प्रधानमंत्री ने उस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया।
सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सहयोग न मिलने के बावजूद पंजाब सरकार ने जाने-माने गीतकार गुलजार द्वारा वॉइस-ओवर के साथ देश की आजादी के साथ जुड़े शहीदी स्थल का देश की आजादी में महत्व के बारे में जानकारी दी है। नरसंहार की भयावहता को दोहराते हुए एक प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम की योजना बनाई है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि पांच वर्षों में महान प्रेरणा के इस स्थान के लिए केंद्र सरकार ने कुछ नहीं किया। पंजाब हैरिटेज एंड टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड की ओर नियोजित किसी भी परियोजना को लागू करने के हमारे बार-बार अनुरोध के बाद अनुमति केंद्र सरकार ने नहीं दी।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह के एक बैठक में भाग लिया था। राजनाथ सिंह और पंजाब सरकार की ओर से नियोजित विकास परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।