राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरक्षा और विकास को दक्षिण और मध्य एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा है कि सभी देश इस मुद्दे पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
दक्षिण एशियाई देशों को एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करना की जरूरत है। राष्ट्रपति बुधवार को चंडीगढ़ सेक्टर-19 स्थित सेंटर फार रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (क्रिड) में आयोजित कान्फ्रेंस में बोल रहे थे।
उन्होंने ने साउथ एंड सेंट्रल एशिया में पीस एंड सिक्योरिटी पर आयोजित इस कान्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पंजाब-हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने कहा कि दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों में भारत की विदेश नीति को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि पहले विदेश मंत्रालय में स्टाफ की कमी के कारण पॉलिसी बनाने में चुनौती का सामना करना पड़ता था। अब मुझे इस बात की खुशी है कि विदेश मंत्रालय ने अपनी पॉलिसी डिविजन को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही नहीं विदेश नीति के लिए अब मंत्रालय विशेषज्ञों और रिसर्च इंस्टीट्यूट की भी मदद ली जा रही है।