जहां आशुतोष महाराज के भक्त आस्था के साथ नूर महल से उनके समाधि से लौटने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं आशुतोष महाराज के गुरु सतपाल महाराज ने कहा है कि आस्था की भी सीमा होती है। आशुतोष शरीर त्याग चुके हैं, अब उनका शव परिजनों को सौंप देना चाहिए।
सतपाल महाराज ने कहा कि डॉक्टरों ने आशुतोष के शरीर त्यागने की पुष्टि करते हुए इसे क्लीनिकल डैथ करार दिया है तो फिर किस वजह से उनके समाधि में जाने और वापस लौटने की बात कही जा रही है।
सतपाल महाराज ने सवाल उठाया कि तेल और बर्फ में प्रोसेस कर शरीर रखे जाने पर वह कैसे लौट सकता है। उनके शिष्यों को सोचना चाहिए कि इस कुप्रचार का मार्ग न अपनाएं और सत्यता को समाज के सामने लाएं।
सतपाल महाराज से दीक्षा ली आशुतोष महाराज ने
सतपाल महाराज ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि दिल्ली के पंजाबी बाग में स्थित मानव उत्थान सेवा समिति में आशुतोष महाराज ने 1970 में उनसे दीक्षा ली थी। उन्हें देश-विदेश में प्रचार प्रसार का जिम्मा दिया गया था। वे 1986 में यह संस्था छोड़ कर चले गए थे। पहले इनका नाम महात्मा वेद प्रवक्तानंद रखा गया था।
सतपाल महाराज के एक अन्य शिष्य हरिसंतोषानंद ने बताया कि आशुतोष महाराज के प्रवक्ता ने सतपाल जी के सांसद निवास पर फोन कर कहा था कि आशुतोष जी अपने गुरु सतपाल महाराज को अचानक छोड़कर चले जाने पर क्षमा मांगने की बात कह गए हैं।
गौरतलब है कि आशुतोष जी महाराज की संस्था दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का दावा है कि यह अध्यात्म जगत के गूढ़ रहस्यों, धर्म व करोड़ों साधकों की आस्था का विषय है और सामान्य बुद्धि व जल्दबाजी में समझना संभव नहीं है। आशुतोष जी महाराज पहले भी कई बार समाधि में जा चुके है।
'समाधि लेट कर नहीं बैठकर ली जाती है'
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज गहन समाधि में हैं या ब्रह्मलीन हो चुके हैं, इसको लेकर जहां चर्चाएं शुरू हो गई हैं वहीं साइंस व परम विज्ञान के बीच भी बहस छिड़ी हुई है।
इस बहस के बीच विश्वविख्यात संत बाबा निर्मल दास जी जोड़े वालों ने संत आशुतोष महाराज की समाधि पर अमर उजाला से बातचीत की। वे जालंधर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे।
रायपुररसूलपुर के संत बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि समाधि तो होती है। इसके बारे में जानकारी उस व्यक्ति को होती है जो ब्रह्मज्ञानी होता है। उन्होंने कहा कि समाधि लेट कर नहीं बैठकर ली जाती है।
बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि समाधि ऐसी नहीं होती, इसका बाकायदा उदय होने का समय होता है। संत जब समाधि में जाते हैं तो अपने नजदीकी को पूरा ज्ञान देते हैं और उदय होने का वक्त भी बताकर जाते हैं।
संत बाबा निर्मल दास ने कहा कि वे हरिद्वार में कई विद्वानों के अलावा शंकराचार्यों के साथ काफी वक्त बिता चुके हैं। यहां के संत बाबा मोहन दास समाधि में जाते थे, उनकी समाधि तो नौ-नौ दिन की होती थी, वे बताकर जाते थे। उनके उदय होने का वक्त होता था और वे उसी समय आकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते थे।
किसी को तो बताकर गए होंगे कि कब लौटेंगे?
स्वामी परमानंद हो या परमहंस जी, जो भी समाधि में गए वे अपने निकटवर्ती को पूरा आगाह करके गए। दूसरे समाधि बैठक में होती है, लेटकर नहीं। संत जब भी समाधि में या ध्यान लगाते हैं, वे जमीन पर आसन बिछाकर समाधि लेते हैं। तीसरे उनके शरीर में अगर किसी हिस्से में कट लगा दिया जाए तो वहां से खून नहीं निकलेगा। अब आशुतोष महाराज के शिष्य अगर मानते हैं कि वे गहन समाधि में हैं तो उनको उस साधक को सामने जरूर लाना चाहिए जिसको महाराज आशुतोष बताकर गए हैं कि वे कब लौटेंगे।
इसके अलावा अगर आशुतोष महाराज गहन समाधि में गए थे तो चिकित्सकों को क्यों बुलाया गया? क्यों इंजेक्शन आदि लगवाए गए? क्यों हार्ट को काफी समय तक पंप किया गया? बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि वे अधिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते लेकिन तस्वीर साफ होनी चाहिए।
संत त्याग कर बैठते हैं गद्दी पर
संत बाबा निर्मल दास जोड़े वालों ने कहा कि दिलीप झा अगर महाराज आशुतोष के बेटे हैं तो भी वे उनके हकदार नहीं हैं। संत जब गद्दी पर बैठते हैं तो सब कुछ त्यागकर ही बैठते हैं। अगर आशुतोष महाराज ने गद्दी पर बैठकर अपनी पिछली जिंदगी व घर से कोई संपर्क या सरोकार नहीं रखा तो अब परिवार का भी उनकी पार्थिव देह पर कोई हक नहीं बनता क्योंकि वे सब कुछ त्याग चुके हैं।
पूर्ण सिंह परिवार को लेने के लिए बिहार निकला
आशुतोष महाराज का ड्राइवर होने का दावा करने वाले पूर्ण सिंह पटना रवाना हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी जान से खतरा बताया है।
पूर्ण सिंह ने कहा कि वे दिलीप झा के परिवार से मुलाकात करने जा रहे हैं और कोशिश करेंगे कि परिवार को बिहार से लेकर पंजाब आएं और उनसे हाईकोर्ट में याचिका दायर करवाई जाए।
पूर्ण सिंह का कहना है कि वे अकेले ही लंबे समय से जंग लड़ रहे हैं। नूरमहल इलाके के कई नेता उनको बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ये लोग उनकी जान भी ले सकते हैं। उनको धमकियां दी जा रही हैं।
पूर्ण सिंह ने कहा कि उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखा है कि उनकी जान माल की सुरक्षा की जाए। पूर्ण सिंह ने कहा कि अगले तीन दिन वे बिहार में रहेंगे और उसकी पूरी कोशिश होगी कि वे परिवार को पंजाब लाने में कामयाब हो जाएं।
आशुतोष महाराज के बेटे हाईकोर्ट जाएंगे!
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के प्रमुख आशुतोष महाराज का बेटा होने का दावा करने वाले मधुबनी के दिलीप झा अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उनकी मांग है कि क्लीनिकली डेड उनके पिता का शरीर अंतिम क्रिया के लिए उन्हें दिया जाए। दिलीप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए संबंधित दस्तावेज हस्ताक्षर करके चंडीगढ़ के एडवोकेट को भेजे हैं।
अगले कुछ दिनों में हाईकोर्ट में उनकी तरफ से याचिका दायर की जा सकती है। बिहार के मधुबनी में अपनी गांव से फोन पर दिलीप झा ने अमर उजाला को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जानकारी बिहार के सीएम नीतीश कुमार को भी दी गई है। दिलीप झा के साले मोहनानंद ने बिहार के मंत्री नीतीश मिश्रा के साथ विस्तार से बातचीत की और पूरे मामले का ब्योरा दिया।
नीतीश मिश्रा ने इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी है। अब दिलीप झा के परिवार के सदस्य जनता दल यूनाइटेड के नेताओं से मदद मिल की उम्मीद कर रहे हैं। दिलीप झा ने बताया कि उन्हें अपने पिता आशुतोष महाराज उर्फ महेश झा के संस्कार धार्मिक रीति रिवाज से पूरे करने हैं। इसके लिए वे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
उन्होंने संबंधित दस्तावेज अपने वकील को चंडीगढ़ भेज दिए हैं। अगर पंजाब आने की जरूरत हुई तो वे जरूर आएंगे। उन्होंने पहले दस्तावेज भेजे थे, उनमें कुछ खामियां थीं। अब उन्हें दूर कर दोबारा भेजा गया है। दिलीप झा ने यह भी कहा कि बिहार में भी दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के काफी अनुयायी हैं, जो अब धीरे धीरे खड़े हो रहे हैं। वे बिना किसी विवाद के चलना चाहते हैं।
मीडिया के सामने देह की मेडिकल जांच की मांग
दिव्य ज्योति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि के मामले में नया मोड़ आ गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले आशुतोष महाराज के कथित ड्राइवर पूर्ण सिंह ने उनकी देह की मेडिकल जांच चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में करवाने का आग्रह किया है। अपील में उन्होंने मीडिया के सामने देह की मेडिकल जांच करवाने का आग्रह किया है।
हाईकोर्ट इस अपील पर मंगलवार को फैसला ले सकता है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने याचिका की मैनटेनिबिलिटी पर सवाल उठाते हुए याची से 11 फरवरी को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने भी हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दिया था।
पंजाब सरकार की ओर से नकोदर के डीएसपी एचपीएस परमार ने पिछले बुधवार को हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। उधर, संस्थान की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आशुतोष महाराज लंबी समाधि की अवस्था में है। संस्थान के मुताबिक आशुतोष महाराज को बंधक बनाकर नहीं रखा गया है, न ही कोई प्रॉपर्टी विवाद चल रहा है।
संस्थान ने याची की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कानूनी रूप से याचिका सही नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएमएस बेदी ने याची के वकील से याचिका के औचित्य पर सवाल उठाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत संस्थान के पास स्वतंत्रता का अधिकार है। इस पर याची के वकील कोई संतोषजनक जवाब हाईकोर्ट में नहीं दे पाए तो हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।