दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल, जालंधर के संस्थापक आशुतोष महाराज के शरीर का अंतिम संस्कार करने के आदेशों के खिलाफ अपील पर पंजाब सरकार ने पक्ष रखने के लिए तीसरी बार समय मांगा। पंजाब सरकार के इस रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि पंजाब सरकार आखिर क्यों कोर्ट को गंभीरता से नहीं ले रही है।
मामले में शुक्रवार को सुनवाई शुरू होते ही पंजाब सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि नए एजी ने आज ही कार्यभार संभाला है, ऐसे में सुनवाई 2 सप्ताह के लिए स्थगित कर दी जाए।
सरकार की इस मांग पर जस्टिस महेश ग्रोवर एवं शेखर धवन की खंडपीठ ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि पिछली सुनवाई पर सरकार ने अटॉर्नी जनरल का हवाला देते हुए समय दिए जाने की अपील की थी और इससे पहले भी दो बार ऐसा ही किया जा चुका है। सरकार का ऐसा रवैया रहा तो इस मामले का कभी निपटारा ही नहीं हो पाएगा।
तीसरी बार समय दिए जाने की अपील करने पर हाईकोर्ट ने सुनाई खरी-खरी
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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खंडपीठ ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अभी यही तय नहीं हो पाया है कि इस पूरे मामले में राज्य सरकार का स्टैंड क्या है। जिस तरह से राज्य सरकार कार्यवाही कर रही है, उससे तो यही लगता है कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन राज्य की प्रक्रिया हमेशा जारी रहती है। हम इस केस को बड़े विस्तार से सुन रहे हैं। ऐसे में सरकार का बार-बार समय मांगना सही नहीं है। सरकार के रवैये से नाराज हाईकोर्ट ने एक बार तो इस केस की सुनवाई लंबे समय तक स्थगित किए जाने के आदेश दे दिए थे, लेकिन बाद में सुनवाई 20 अप्रैल तक स्थगित कर दी गई।
तीन सुनवाई पूर्व ही आशुतोष महाराज के कथित पुत्र दलीप कुमार झा और संस्थान की ओर से लगभग तीन घंटे चली बहस में अपनी-अपनी दलीलें पूरी कर ली गई थईं। इन दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने पर हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए मामले की सुनवाई एक मार्च तक स्थगित कर दी थी, लेकिन एक मार्च को भी सरकार ने सुनवाई स्थगित किए जाने की हाईकोर्ट से मांग की। हाईकोर्ट ने इस मांग को मानते हुए सुनवाई 17 मार्च शुक्रवार तक स्थगित कर दी थी, लेकिन शुक्रवार को एक बार फिर सरकार की ओर से सुनवाई दो सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित किए जाने की मांग पर हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगा दी है और साफ निर्देश दे दिए हैं कि अब आगे से इस मामले में सुनवाई स्थगित किए जाने की कोई भी मांग नहीं मानी जाएगी।